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    Vishakha Guidelines in Hindi | Women Harassment की Complaint कब, किसे और कैसे करें?

    Vishakha Guidelines in Hindi | Women Harassment की Complaint कब, किसे और कैसे करें

    आज जिस तरह से हर क्षेत्र में महिलाकर्मियों की भागीदारी बढ़ी है. इसको देखते हुए उनके लिए Supreme Court के Order के बाद Worke Place पर Women Harassment से बचने व् Security के लिए बने Vishakha Guildlines की जानकारी अत्यंत आवश्यक है.

    Vishakha Guidelines in Hindi | विशाखा गाइडलाइंस क्या है?

    आज हम इसी के तहत Vishakha Guildlines के बारे में इधर-उधर से Information इकठ्ठी कर Female Employees के लिए update कर रहे हैं. अगर आप Working Women, Student या अन्य कोई भी हो तो हर Females के यह Right सभी को पता होना चाहिए. अगर आपके Company, Office, School, College, Organization जिसमे कम से कम 10 Working Women, Students, etc हो. उसमें Vishakha Guildlines के तहत "Internal Complaint Committee” (इंटर्नल कम्प्लेन कमेटी) ICC होना अनिवार्य है. अगर कम्पनी, ऑफिस, स्कुल, कॉलेज, संस्था इस कमेटी का गठन नही करता और Complaint होने पर ज्यादा से ज्यादा 50 हजार का जुर्माना या Company का Registration Cancel या दोनों हो सकता है. आखिर क्या है यह Vishakha Guildlines -

    Rajasthan की राजधानी जयपुर के निकट भटेरी गांव की एक Female भंवरी देवी ने बाल विवाह विरोधी अभियान में हिस्सेदारी की बहुत बड़ी कीमत चुकाई थी. वर्ष 1992 में उनके साथ बलात्कार किया गया साथ ही अन्य मुसीबतें भी उन्हें झेलनी पड़ीं. उनके मामले में कानूनी फैसलों के आने के बाद विशाखा और अन्य महिला गुटों ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर (PIL) की थी. इस याचिका में Court से आग्रह किया गया था कि Working Women के बुनियादी Rights को सुनिश्चित कराने के लिए संविधान की धारा 14, 19 और 21 के तहत कानूनी प्रावधान किए जाएं.

    Court ने Vishakha Guidelines को उपलब्ध कराया

    महिला गुट विशाखा और अन्य संगठनों की ओर से दायर इस याचिका को विशाखा और अन्य बनाम राजस्थान सरकार और भारत सरकार के मामले के तौर पर जाना गया. इस मामले में Working Women को यौन अपराध, उत्पीड़न और प्रताड़ना से बचाने के लिए Court ने Vishakha Guidelines को उपलब्ध कराया और अगस्त 1997 में इस फैसले में Work Place पर Sexual Harassment की बुनियादी परिभाषाएं दीं. Court ने वे दिशा निर्देश भी तय किए जिन्हें आम तौर पर Vishakha Guidelines के तौर पर जाना जाता है. इसे तब भारत में महिला गुटों के लिए एक महत्वपूर्ण जीत के तौर पर माना गया था.
                 
    वर्तमान समय में ज्यादा से ज्यादा Females काम के लिए घर से बाहर निकल रही हैं परन्तु उन्हें कभी ना कभी किसी ना किसी रुप में Work Place पर Sexual Harassment का शारीरिक या मानसिक रुप भोगना पड़ता है. इसका असर महिलाओं के पूरे व्यक्तित्व पर पड़ता है. जिन स्त्रियों ने इसे भोगा है. वही इसकी पीड़ा को समझ सकती हैं. महिला का आत्म विश्वाश डगमगाने लगता है. उस स्थिति में वह अपने को असहाय समझने लगती है. उसके आत्मविश्वास को तार-तार कर दिया जाता हैं. ज्यादातर Females चाह कर भी यौनिक हिंसा करने वाले के खिलाफ कोई कार्यवाही नही कर पाती है और घुट-घुट कर मानसिक तनाव में जीने को मजबूर रहती हैं.
       
    यही असुरक्षा की भावना Females को कई बार ना चाहते हुए भी चार दीवारी में कैद कर देती है. जिससे उसका स्वंय का विकास तो रुकता ही है साथ ही देश के लिए भी एक बड़ा वर्ग कोई Productive Work नही करता और देश  के विकास में अपना बहुमूल्य योगदान नही दे पाता. यह स्थिति कमोवेश संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में काम करने वाली महिलाओं की है पर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं के साथ यह बात ज्यादा लागू होती है, ऐसे परिस्थितियों में वे समझ नही पाती की न्याय के लिए कहॉ जायें, किससे शिकायत  करें, किसे अपनी पीड़ा बताऐं?

    Women Harassment  खिलाफ Workplace पर सुरक्षा विधेयक

    Women Sexual Harassment के खिलाफ Workplace पर सुरक्षा विधेयक, 2010 में बने कानून पर 3 अगस्त 2012 को संसद ने मंजूरी दे दी. भारत के केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद में कार्य स्थलों पर महिलाओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में, चाहे संगठित या असंगठित. उपाय लिंग समानता और सशक्तिकरण को प्राप्त करने में मदद मिलेगी.

    प्रस्तावित विधेयक, यदि अधिनियमित यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी कार्य स्थलों पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं की रक्षा कर रहे हैं, यह सार्वजनिक या निजी क्षेत्र में. यह उनके लिए शर्तों को हर जगह काम करने में समानता, जीवन और स्वतंत्रता और समानता लिंग का अधिकार की प्राप्ति के लिए योगदान देगा. कार्यस्थल पर सुरक्षा की भावना काम में महिलाओं की भागीदारी में सुधार, उनके आर्थिक सशक्तिकरण और समावेशी विकास में परिणाम होगा. एक Female कार्यस्थल पर किन स्थितियों के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है, यह स्थितियां निम्न प्रकार की हो सकती हैं:

    कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न क्या है?  Women Harassment की Complaint कब करें

    "महिलाओं के प्रति अश्लील टिप्पणी, अश्लील फिल्में दिखाना, अवांछित रूप से शारीरिक छुअन, अश्लील बातें करना, अश्लील एसएमएस भेजना, फोन काल करना, काम में वरीयता देने की पेशकश करना, काम में बाधा उत्पन्न करने की धमकी देना, मौजूदा और भविष्य के जॉब उपलब्धियों को प्रभावित करने की धमकी देना, अपने व्यवहार से कार्यस्थल को डरावना और दखलपूर्ण बनाने वालों के खिलाफ कम्प्लेन किया जा सकता है."         
    अगर  हम चाहते है कि महिलाओं को घर और बाहर सुरक्षित माहौल मिले, उसके साथ होने वाली यौनिक हिंसा खत्म हो तो समाज में गहराई से व्याप्त पितृसत्तात्मक सोच को भी  बदलना होगा. उन सभी रीति रिवाज, परम्परा, मान्यताओं, रुढ़ीयों को खत्म करना होगा. जो महिलाओं के पैरों को जंजीरों से बांध देते हैं. पुरुषों को ये समझना होगा कि घर के बाहर की दुनिया में उनका ही एकाधिकार नही होगा. वहॉ आधी दुनिया भी आहिस्ता आहिस्ता दस्तक दे रही हैं और अपनी उपस्थिति का एहसास मजबूत और मुक्कमल तरिके से करवा रही है.

    अगर कार्यस्थल आपका कोई यौन उत्पीड़न कर रहा तो क्या करें?

    अगर Work Place पर आपका कोई यौन उत्पीड़न कर रहा तो उसकी Written Complaint करने से पहले कुछ Home Work कर लें. ताकि आपको आपकी बात साबित करने में आसानी हो. अगर आपका Boss या कोई सहकर्मी आदि कोई भी आपको Harassment  करता है तो कोशिश करें कि इसकी जानकारी अपने आसपास बैठने वाले सहकर्मी को इसकी जानकारी दें और चुपके से अपने Mobile से उसका ऑडियो/वीडियों Record कर लें. अगर अश्लील मैसेज आदि करता तो स्क्रीन शॉट बना कर रख लें. इस तरह के मामले में बहुत कम सहकर्मी ही अपने महिला सहकर्मी का साथी दे पाते हैं तो उस समय आपका Mobile Clip/ Screen Short बहुत ही काम का साबित होगा.

    Sexual Harassment की Complaint कैसे की जानी चाहिए ?

    Sexual Harassment की Complaint  लिखित रूप में की जानी चाहिए.  यदि किसी कारणवश पीड़ित लिखित रूप में Complaint नहीं कर पाती है तो समिति के सदस्यों की ज़िम्मेदारी है कि वे लिखित शिकायत देने में पीड़ित की मदद करें.

    उदाहरण के तौर पर, अगर वह महिला पढ़ी लिखी नहीं है और उसके पास लिखित में Complaint लिखवाने का कोई ज़रिया नहीं है तो वह समिति को इसकी जानकारी दे सकती है, और समिति की ज़िम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे की पीड़ित की Complaint बारीक़ी से दर्ज़ की जाए .

    यौन उत्पीड़न/Sexual Harassment की Complaint किसको करनी चाहिए?

    अगर आपके Company/संगठन/ संस्थान में Internal Complaint Committee (आंतरिक शिकायत समिति) है तो आप सीधे लिखित शिकायत उस Committee के President  के नाम से करें और उसका Receiving  ले लें. अगर दुर्भाग से यह Committer नहीं है या इसकी जानकारी किसी को नहीं तो आप अपने Company /संगठन/ संस्थान प्रबंधन को दें. यह उनकी जिम्मेवारी है कि आपका शिकायत सीधे Internal Complaint Committee को देंगे. अक्सर इस तरह के गतिविधि में संलिप्त व्यक्ति को बचाने की कोशिश Company Management करती है. इसलिए या जरूर ध्यान रखें कि Verbal Complaint या बिना Receiving लिए Complaint का कोई करवाई नही होगी. Company Management वाले सीधे नकार देंगे कि हमें तो Complaint मिला ही नहीं.

    क्या पीड़ित के तरफ से कोई और Complaint कर सकता है?

    अगर कोई पीड़िता शारीरिक रूप से Compliant करने में असमर्थ है तो उनका कोई रिश्तेदार, सगा संबंधी, उसके साथ काम करने वाला या ऐसा कोई भी व्यक्ति जो इस घटना के बारे में जनता हो, वह पीड़िता की अनुमति लेकर इस घटना की Complaint कर सकता है.  

    इसके साथ ही यदि पीड़िता कोमा में या बेहोश है या उसकी मृत्यु हो चुकी है, तो कोई भी व्यक्ति जिसे इस घटना के बारे में पता हो, पीड़ित के कानूनी उत्तराधिकारी की सहमति से Complaint  कर सकता है. अगर पीड़िता Complaint दर्ज करने की Mental स्थिति में नहीं है, तो उसके रिश्तेदार या मित्र, उसके विशेष शिक्षक, उसके मनोचिकित्सक/मनोवैज्ञानिक, उसके संरक्षक या ऐसा कोई भी व्यक्ति जो उसकी देखभाल कर रहे हैं, शिकायत कर सकते हैं. साथ ही कोई भी व्यक्ति जिसे इस घटना के बारे में पता है,उपरोक्त व्यक्तियों के साथ मिल कर संयुक्त Complaint महिला आयोग से राष्ट्रीय महिला आयोग कहीं भी की जा सकती है.

    ICC (Internal Complaint Committee) Complaint मिलने के बाद क्या करेगी?

    ICC (Internal Complaint Committee) को जैसे ही Complaint मिलता है वैसे ही  ICC पीड़ित महिला के इच्छा पर मामले को ‘Concealing  (समाधान) की प्रक्रिया से भी सुलझाया जा सकता है. वह इस दोनों पक्ष के इच्छा से समझौता कराने की कोशिश करता है, मगर ऐसे किसी भी समझौते में पैसे के भुगतान द्वारा समझौता नहीं किया जा सकता है.

    यदि पीड़ित महिला समझौता नहीं चाहती है तो जांच की प्रक्रिया शुरू होगी. जिसे कानून के मुताबिक Internal Complaint Committer को 90 दिन में पूरा करना होगा. यह जांच Sexual Harassment Of Women At Workplace Act, 2013  के मुताबिक होगा. इसके तहत ICC  दोनों पक्षों के गवाहों और मुद्दे से जुड़े दस्तावेजों की जांच करती है. ऐसे समिति के सामने वकीलों को पेश होने की अनुमति नहीं है. 

    उक्त जांच के समाप्त होने पर यदि ICC आरोपी को को Sexual Harassment का दोषी पाती है तो ICC नियोक्ता को आरोपी के ख़िलाफ़ कार्यवाही करने के लिए सुझाव देगी.

    यकीन है कि इस जानकारी के बाद आप अपने ऑफिस/संस्था के महिला वर्करों के लिए बने इस कानून को लागू करने की मांग करेंगे. हम इसके आगे की भी जानकारी उपडेट करेंगे. इसके साथ ही इस संबंध में कोई भी सवाल हो तो कमेंट बॉक्स में लिखकर अवश्य पूछें. 

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    5 comments:

    1. Dear Sir,

      Request you to please read my words below...

      I am working in an MNC company and worked here for 7 years..
      There is rating (XCL) in our company which is given to the employee based on their performance. X= excellent, C= average, L= poor
      From past 6 years, I was getting average rating of "C", but this time I got "L".
      Now my manager is saying me to leave the company by 1st of July.
      As per my experience, I don't have poor performance but average.
      My manager never appreciated me. He insulted me in team meeting and used abusive words to me. Even though I never misbehaved with my manager for harassing me.

      If I compare me with other team members, I am not bad performer.

      Kindly let me know your valuable suggestions , what to do in this case.

      Thanks,
      Sanjeev

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      1. संजीव जी,आपकी समस्या बहुत ही कॉमन है. यह आपके बॉस और आपके बीच सही तालमेल की कमी है.शायद वो आपसे चिढ़ते हों, चाहे इसका जो भी वजह हो. मगर मैं कहूंगा कि एकबार आप प्यार से अकेले में अपने बॉस से बात कर देखें. उनको बताये कि उनके इस तरह के व्यवहार से आपको कितना तकलीफ होता है. अगर वो आपकी जगह होते तो कैसा महसूस करते. आदि-आदि. इसके अलावा अगर बात नही बने तो आप उनके ज्याददतियों का सबूत जुटाकर रखें और उसके साथ higher मैसर्जमेंट को लिखित सूचना दें. शायद कोई अधिकारी आपकी समस्या का समाधान कर सके.अगर आपका परफॉरमेंस खराब है तो क्या आपको नोटिस किया गया? अगर आपका परफॉरमेंस खराब था तो 7 वर्ष से आप कैसे काम कर रहे हैं. आप किसी भी हाल में कंपनी नही छोड़े और अगर इस तरह की ज्यादत्ती (गाली गलौज आदि) हो रही तो आप पुलिस में लिखित शिकायत करें.अगर गैरकानूनी टर्मिनेशन करे तो लेबर कमिश्नर से शिकायत करें.

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    2. Sir same mere sath bi yahi problem h..or Meri 7.8mnth ki parfomnce dekhkr mujhe letter issue Kara improve karne kliye may mnth letter diya 1mnth ka improve krne ko July mnth Mai kimprove hua kuchh bt use ignore kiya gaya..or mujhe pareshn Kiya jara h ki resin dalo warna tarminet Kar Diya jayega..mere Mana karne par ab mujhe pareshn krne ki koshis ki jari h..or boss se Mai apn koi baat karu ho ni sakta kyuki vo jistarha se mujhse baat krte h battamizi se..or ek bat nhi sunte..do sal phle Jo floor Mai vi mujhse battamizi see bole Maine do bar bardash Kiya fir Meri trf se bhi yahi ans gaya ki AP mujhse aise kyu baat Kar rahe..to or Jada chillaye..fir dobara kuchh tym baad yahi Kiya..isliye tab se wo Mera koi bi kaam ka point hi dhunte h.or jb koi Mila to mere sath aisa Kiya jara h...kyaa Mai isme bi harsmnt ka case kr skti hu,..sonia

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      1. मेरे ख्याल से 6 महीने का प्रोबेशन पीरियड पूरा करने के बाद प्रोफॉर्मस खराब का सवाल कैसे पैदा हुआ. ऐसे भी आप 3 वर्ष पूरा करने के बाद रेगुलर वर्कर हैं. आप अपने उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत करें कि अमुक व्यक्ति पुराने किसी रंजिश को लेकर मुझे परेशान कर रहा हैं. अगर मेरे परफॉरमेंस को लेकर कोई प्रॉब्लम है तो मुझे कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा जाता न कि वह मुझे मौखिक रूप से रिजाइन देने को कह कर दबाब बनता. इसके साथ ही उस ईमेल में लिखें कि दूसरी बात कि आपके उस अधिकारी कोई महिला स्टाफ से बात करने की तरीका नहीं पता ....वो हमेशा चिल्लाकर बात करते हैं. आपसे गुजारिश है कि ऑफिस का माहौल खुशनुमा बनाये रखने के लिए अपने स्तर से कार्रवाई की जाए...इसके साथ आपके साथ जो भी वो अधिकारी बोलता है जैसे भी बोलता हैं....वर्ड टू वर्ड लिखकर दें. इसका रिसीविंग लें. अगर ईमेल से सेंड करती हैं तो अपने पर्सनल आईडी का यूज करें या ऑफिसियल आईडी यूज कर रही तो अपने पर्सनल आईडी को भी मार्क करें...जब आपके अधिकारी बुलाएं तो उनके सामने सही तरीके से अपनी बात रखें. इसके बाद जैसा भी हो..हमें जरूर बताएं.

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    3. Ok..sir ye baat to AP sahi bol rahe par kuchh ye bhi bol rahe h ki management mili hoti or unka hi sath degi..Mai mail to karungi par aesi koi baat hoti h to kyaa Kar skti hu..

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