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    International Labour Day क्यों मानते हैं | May Day History और Employees Rights

    International Labour Day, International Labour Day क्यों मानते हैं | May Day History and Employees Rights

    आज 1 मई को International Labour Day मनाया जाता हैं. आपको सबसे पहले मजदुर दिवस की हार्दिक बधाई. आपमें से बहुत से लोग जानते होंगे कि मजदुर दिवस कब से और क्यों मानते हैं.  मगर हम अपने इस आर्टिकल के माध्यम से इसकी जानकारी देते हुए अभी की वर्तमान परिस्थिति की चर्चा करने जा रहे हैं. जिससे की आप May Day History और Employees Rights जान पायेंगे.

    International Labour Day 2019

    आपमें से एक साथी का काफी पहले मैसेज आया कि हमारा मालिक हमारे मज़बूरी का फायदा उठता हैं. हम मजबूर हैं नहीं तो ये करते, वो करते..आदि आदि. जबकि भले ही कुछ लोग खुद को मजबूर समझते हैं. मगर खुद को (मजदूर) को मजबूर समझना हमारी सबसे बड़ी गलती है, मजदूर अपने खून पसीने की कमाई खाते हैं. मजदूर ऐसे स्वाभिमानी लोग होते हैं जो थोड़े में भी खुश रहते हैं और अपनी मेहनत व लगन पर विश्वास रखते हैं. इन्हें किसी के सामने हाथ फैलाना पसंद नहीं होता है. एक मई को दुनिया के कई देशों में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस (International Labour Day 2019) मनाया जाता है जिसे लेबर डे, मई दिवस, श्रमिक दिवस और मजदूर दिवस भी कहा जाता है. इस दिन देश की लगभग सभी कंपनियों में छुट्टी रहती है.

    मजदूर दिवस को क्यों और कब से मानते हैं?

    अब आपके मन में जरूर यह सवाल होगा कि मजदूर दिवस को क्यों और कब से मानते हैं?  इसका बहुत आसान सा जवाब हैं कि अंतराष्ट्रीय तौर पर मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत 1 मई 1886 को हुई थी. अमेरिका के मजदूर संघों ने मिलकर निश्चय किया कि वे 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं करेंगे, जिसके लिए संगठनों ने हड़ताल की. 1 मई 1886 को अमेरिका की सड़कों पर तीन लाख मजदूर उतर आए. शिकागो में 4 मई 1886 में मजदूर आठ घंटे काम की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. इसी दौरान शिकागो की हेय मार्केट में बम ब्लास्ट हुआ, प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पुलिस ने मजदूरों पर गोली चला दी जिसमें कई मजदूरों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए.
     

    इसके बाद शिकागो शहर में शहीद मजदूरों की याद में पहली बार मजदूर दिवस मनाया गया. पेरिस में 1889 में अंतराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन में ऐलान किया गया कि हेय मार्केट नरसंघार में मारे गए निर्दोष लोगों की याद में 1 मई को अंतराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा और इस दिन सभी कामगारों और श्रमिकों का अवकाश रहेगा. साथ ही साथ मजदूर दिवस पर सभी मजदूरों की छुट्टी होगी. तब से ही भारत समेत दुनिया के 80 देशों में मई दिवस को राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाने लगा. हेय मार्केट में हुए गोलीकांड के लिए एक ट्रयाल का गठन किया गया. जांच के अंत में चार अराजकतावादियों को सरेआम फांसी दे दी गई.

    इससे पहले मजदूरों को 8 घंटे से ज्यादा यानी 16 घंटे तक काम करना पड़ता था. वो बधुआ मजदूरों की तरह काम करते थे. अब ऐसे में हमारे देश से बहुत दूर अमेरिका में आंदोलन होता हैं. जिसका असर भारत में भी पड़ता हैं. यह भारत में कैसे लागु हुआ, हम इसकी बात नहीं कर रहे बल्कि यह बताने की कोशिश कर रहे कि शिकागो के आंदोलन का असर विश्वस्तरीय हुआ. जिसके फायदा हर देश में काम करने वाले मजदूरों को मिला.
     

    हमारे देश भारत में मजदूर दिवस कामकाजी लोगों के सम्मान में मनाया जाता है. भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत चेन्नई में हुई. भारत में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान ने 1 मई 1923 को मद्रास में इसकी शुरुआत की थी. इस मौके पर पहली बार भारत में आजादी के पहले लाल झंडे का उपयोग किया गया था. इस पार्टी के लीडर सिंगारावेलु चेत्तिअर ने इस दिन को मनाने के लिए 2 जगह कार्यक्रम आयोजित किए थे. पहली बैठक ट्रिपलीकेन बीच में और दूसरी मद्रास हाईकोर्ट के सामने वाले बीच में आयोजित की गई थी. सिंगारावेलु ने यहां भारत सरकार के सामने दरख्वास्त रखी थी कि 1 मई को मजदूर दिवस घोषित कर दिया जाए, साथ ही इस दिन राष्ट्रीय अवकाश रखा जाए. उन्होंने राजनीतिक पार्टियों को अहिंसावादी होने पर बल दिया था. हालांकि उस समय इसे मद्रास दिवस के रूप में मनाया जाता था.

    International Labour Day क्यों मानते हैं | May Day History और Employees Rights


    डिजिटल इंडिया और मजदुर दिवस 

    आज हम 2019 में पहुंच चुकें हैं. जिसको डिजिटल इंडिया के नाम से भी जानतें हैं. आज तो कुछ ऐसे भी कंपनियों खुले-आम चल रही हैं. जिसमें सुवह 9 बजे मजदूरों को फाटक के अंदर लेकर ऐसे बंद कर दिया जाता, जैसे वहां कुछ हो ही न. जिसके बाद सीधे 9 बजे रात को ही खुलता हैं. उनको बधुआ मजदूरों की भांति काम करवाया जाता हैं. आपको जानकर तक ज्यादा हैरानी होगी जब पता चलेगा की देश की राजधानी दिल्ली भी इससे अछूती नहीं हैं.
     

    अब ऐसे में कई लोगों तो यह भी पता नहीं की कानूनन उनकी शिफ्ट कितने समय की होती हैं. आजकल धीरे-धीरे 8 घंटे की जगह बेरोकटोक 9-12 घंटे तक बिना ओवरटाइम के काम लिया जाने लगा हैं. जबकि अभी तक यह गैरकानूनी हैं. हम मजदूरों के लिए 8 घंटे का शिफ्ट इसलिए होता ताकि दूसरे 8 घंटे हम अपने परिवार अपने बच्चों के साथ बीता सकें और तीसरा 8 घंटे में आराम कर सकें. ताकि अगले दिन पुनः काम के लिए तैयार हो सकें.

    अगर आज हम 8 की जगह 9-12 घंटे काम करने के लिए विवश हैं उसका मुख्य कारण जानकारी का आभाव और मजदूरों में एकता की कमी हैं. ऐसे में अगर हम इस कमी को दूर कर लें तो फिर से अपने 8 घंटे को पा सकते हैं. इसके लिए हरेक साथी तक यह जानकारी पहुंचाने की जिम्मेवारी आपकी हैं. धन्यबाद.

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