Female labour act in india in hindi भारत में महिला श्रम अधिनियम की जानकारी

आज हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी हैं. वह पुरानी रूढ़िवादी विचार को परे धकेल कर आगे बढ़ रही हैं. मगर असल में जहाँ वह काम करती हैं किसी न किसी रूप में शोषण का शिकार हो रही हैं. उसका मुख्य वजह उनको कार्यस्थल पर अपने अधिकारों (Female Labour Act in india in hindi  भारत में महिला श्रम अधिनियम हिंदी में) की जानकारी की कमी हैं. अगर आप एक महिला हैं और कहीं जॉब करती हैं तो यह जानकारी आपके लिए बहुत ही उपयोगी हैं. आपको अपने ऑफिस में क्या-क्या कानूनी अधिकार मिले हुए हैं, हम इसको सूचीवद्ध तरीके से जानेंगे.

Female labour act in india in hindi

हमारे देश की महिलाएं (Female )भारतीय कार्यबल का एक अभिन्न अंग हैं. भारत के रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया द्वारा प्रदान की गई सूचना के अनुसार, महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 2001 में 25.63 प्रतिशत थी. यह 1991 में 22.27 प्रतिशत और 1981 में 19.67 प्रतिशत की तुलना में वृद्धि है. एक तरफ जहां महिलाओं की भागीदारी का दर जिस प्रकार से वृद्धि हो रहा ठीक वही दूसरी ओर पुरुष श्रम भागीदारी दर की तुलना में लगातार उल्लेखनीय रूप से कमी होती जा रही हैं.

देश में 2004-05 के दौरान कुल श्रम-शक्ति का अनुमान 455.7 मिलियन लगाया. जिसम केवल महिला श्रमिकों की संख्या 146.89 मिलियन थी. खैर, यह तो हुई डाटा आधारित महिला श्रम शक्ति की जानकारी. अब जो हमारा असल मुदा हैं उसपर बात करते हैं.

हमारे देश के श्रम कानून में महिला श्रमिकों (Female Labour)के हितों को सुरक्षित रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षात्मक प्रावधान तय किये गए हैं. आज हम उसको पॉइंट वाइज बताने की कोशिश करेंगे.

Female labour act in india in hindi | भारत में महिला श्रम अधिनियम की जानकारी

इससे पहले हमने महत्वपूर्ण Employee Rights in India को जाने, Know Your Labour Rights in hindi की जानकारी दी थी. जिसके बाद आपमें से कई महिला साथिओं ने पूछा कि इसके अलावा Female labour act in india in hindi भारत में महिला श्रम अधिनियम की जानकारी की जानकारी दें. इसलिए इसके आलावा भी महिओं के लिए लेबर एक्ट के तहत कुछ ख़ास अधिकार दिए गए हैं. जिसकी जानकारी आज हम देने जा रहें हैं.

महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षा/स्वास्थ्य संबधी उपाय-

अगर आप महिला कर्मचारी हैं और किसी फैक्ट्री में काम करती हैं तो फैक्ट्री ऐक्ट (कारखाना अधिनियम), 1948 का सेक्शन (खंड) 22(2) के अनुसार आपको प्राइम मूवर (मूल गति उत्पादक) या किसी भी ट्रांसमिशन मशीनरी के किसी भी भाग की सफाई, ल्युब्रिकेट या समायोजित करने का काम नहीं करवाया जा सकता हैं जब प्राइम मूवर ट्रांसमिशन मशीनरी गति में होता है. इसके अलावा यदि सफाई, ल्युब्रिकेशन अथवा समायोजन के कारण महिला को उस मशीन से अथवा आसपास के मशीन से घायल होने का खतरा हो तब भी यह काम नहीं करवाया जा सकता हैं.

फैक्ट्री ऐक्ट (कारखाना अधिनियम) 1984, सेक्शन 27, द्वारा कॉटन प्रेसिंग के लिए जिसमें कॉटन ओपनर काम कर रहा होता है, कारखाने के किसी भी भाग में महिला श्रम को प्रतिबन्धित किया गया है.

महिला कर्मचारी से रात्रि में कार्य का नियम

इसके बाद आपका सवाल होता हैं कि क्या किसी महिला कर्मचारी/कामगार (Female Labour) को रात्रि में ड्यूटी लिया जा सकता हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फैक्ट्री ऐक्ट (कारखाना अधिनियम) 1948, सेक्शन (खंड) 66(1)(बी), के अनुसार किसी भी महिला को किसी भी कारखाने में 6 बजे सुबह से लेकर शाम 7 बजे के बीच के समय के अलावा काम करने की अनुमति नहीं है. इसके मतलब शाम के 7 बजे से लेकर सुबह के 6 बजे के बीच काम नहीं लिया जा सकता हैं.
इसके आलावा बीड़ी और सिगार वर्कर (रोजगार की शर्ते) ऐक्ट 1966, सेक्शन (धारा) 25 के अनुसार किसी भी महिला को 6 बजे सुबह से लेकर शाम 7 बजे के बीच के समय के अलावा औद्योगिक परिसर में काम करने की अनुमति नहीं है.
जो महिला खदान में काम करती हैं उनको भी माइंस ऐक्ट (खान अधिनियम) 1952, सेक्शन 46(1)(बी) के तहत किसी भी जमीन के ऊपरी खदान में 6 बजे सुबह से लेकर शाम 7 बजे के बीच के समय के अलावा काम करने की अनुमति नहीं है.

महिला कामगारों से भूमिगत कार्य में काम लिया जा सकता हैं?

माइंस ऐक्ट (खान अधिनियम) 1952, सेक्शन 46(1)(बी) जमीन के नीचे के खान के किसी भी भाग में महिला श्रम को प्रतिबन्धित करता है मतलब किसी भी हाल में खान के अंदर महिला श्रमिकों से काम नहीं लिया जा सकता हैं.

महिलों के लिए मेटर्निटी बेनिफिट Maternity Benefit (प्रसूति – लाभ)

अगर आप महिला कर्मचारी/कामगार हैं तो आपको मेटर्निटी बेनिफिट ऐक्ट 1961 तक तहत बच्चे के जन्म से पहले और बाद में निश्चित प्रतिष्ठानों में निश्चित अवधि के लिए मातृत्व लाभ प्रदान करता है.अभी हाल ही में संसद में मातृत्व लाभ (संशोधन) बिल, 2016 पास किया गया हैं. जिसमें सभी महिलाओं के लिए 12 हफ्ते तक के मातृत्व अवकाश का प्रावधान करता है. बिल में इस अवधि को बढ़ाकर 26 हफ्ते किया गया है, लेकिन दो या दो से अधिक बच्चों वाली महिलाएं 12 हफ्ते के मातृत्व अवकाश के लिए ही अधिकृत हैं. इस एक्ट के अंतर्गत वैसी प्रतिष्ठान और अन्य अधिसूचित प्रतिष्ठान आते हैं जिसमें 10 या 10 से अधिक कर्मचारियों काम करते हों.

भवन एवं अन्य कंस्ट्रक्शन (रोजगार और सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1996 महिला लाभार्थी को मातृत्व लाभ के लिए वेलफेयर फंड (कल्याण निधि) प्रदान करता है.

महिला श्रमिकों के लिए कार्यस्थल पर शौचालय ओर पेशाबघर का प्रावधान

अलग-अलग एक्ट के अनुसार महिला कमचारियों/श्रमिकों (Female Labour) के लिए अलग शौचालय और पेशाबघर का प्रावधान होता हैं, जो निम्न प्रकार से हैं-
  1. कॉन्ट्रेक्ट लेबर (विनियमन एवं उन्मूलन) ऐक्ट, 1970 का नियम 5
  2. फैक्ट्री ऐक्ट (कारखाना अधिनियम), 1948 की धारा 19
  3. इंटर स्टेट माइग्रेंट वर्कमेन (इंटर स्टेट प्रवासी कर्मकार) (आरईसीएस) सेंट्रल रूल्स (केन्द्रीय नियम), 1980 का नियम 42

महिला श्रमिकों के लिए अलग धोने की (वॉशिंग) सुविधा का प्रावधान

महिला श्रमिकों (Female Employee) के लिए अलग धोने की (वॉशिंग) सुविधा का प्रावधान जो निम्नलिखित के अंतर्गत आता है:
  1. कॉन्ट्रेक्ट लेबर (विनियमन एवं उन्मूलन) ऐक्ट, 1970 का सेक्शन (धारा) 57
  2. फैक्ट्री ऐक्ट, 1948 का सेक्शन (धारा) 42
  3. इंटर स्टेट माइग्रेंट वर्कमेन (इंटर स्टेट प्रवासी कर्मकार) (आरईसीएस) ऐक्ट, 1979 का सेक्शन(धारा) 43

कार्य स्थल पर महिला कर्मियों के बच्चों के लिए क्रेच का प्रावधान

महिला कामगारों के नवजात बच्चों की देखभाल के लिए कार्य स्थल पर महिला कर्मियों के बच्चों के लिए क्रेच का प्रावधान हैं जो कि निम्नलिखित Act के अंतर्गत आता है:
  1. माइंस ऐक्ट (खान अधिनियम) 1952 का सेक्शन (धारा) 20
  2. फैक्ट्री ऐक्ट (कारखाना अधिनियम), 1948 का सेक्शन (धारा) 48
  3. इंटर स्टेट माइग्रेंट वर्कमेन (आरईसीएस) अधिनियम, 1979 का सेक्शन (धारा) 44
  4. प्लांटटेशन लेबर एक्ट (बागान श्रम अधिनियम), 1951 का सेक्शन (धारा) 9
  5. बीड़ी और सिगरेट वर्कर (रोजगार की शर्ते) अधिनियम 1966, का सेक्शन (धारा) 25
  6. बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन (भवन एवं अन्य कंस्ट्रक्शन) (रोजगार और सेवा की शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1996 का सेक्शन 35

कार्यस्थल पर महिला उत्पीड़न से सुरक्षा प्रावधान

ऐसे तो यह लेबर कानून के अंतर्गत नहीं आता मगर कामकाजी महिलाओं के लिए सबसे जरुरी जानकारी हैं. अगर आपको या आपके किसी भी महिला साथी के साथ कार्यस्थल पर उत्पीड़न किया जाता हो तो चुप न रहें. आपकी चुप्पी उनकी हिम्मत हैं. आप नौकरी जाने से न डरे, क्योकि किसी भी महिला के लिए मानसम्मान से बढ़कर नौकरी नहीं हैं.

अगर आप Working Women, Student या अन्य कोई भी हो तो हर Females के यह Right सभी को पता होना चाहिए. अगर आपके Company, Office, School, College, Organization जिसमे कम से कम 10 Working Women, Students, etc हो. उसमें सुप्रीम कोर्ट के Vishakha Guildlines के तहत “Internal Complaint Committee” (इंटर्नल कम्प्लेन कमेटी) ICC होना अनिवार्य है.

अगर कम्पनी, ऑफिस, स्कुल, कॉलेज, संस्था इस कमेटी का गठन नही करता और Complaint होने पर ज्यादा से ज्यादा 50 हजार का जुर्माना या Company का Registration Cancel या दोनों हो सकता है. इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए हमारे इस पोस्ट को पढ़िए – Vishakha Guidelines in Hindi | Women Harassment की Complaint कब, किसे और कैसे करें?

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