Draft Code on Wages Central Rules in Hindi से किसको फायदा मिलेगा?

केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय ने वेज कोड बिल के रूल्स का ड्राफ्ट (Draft Code on Wages Central Rules) तैयार कर लिया हैं. जिसके बाद इसको गजट के रूप में प्रकाशित कर 7 जुलाई 2020 को पब्लिक डोमेन में गया था. जिस पर आप 45 दिन में सुझाव या आपत्ति भेज सकते हैं. इसके बाद कोई आपत्ति ने होने पर लागू कर दिया जायेगा. आज हम इसी के बारे में कुछ प्रमुख जानकारी देने जा रहे हैं ताकि आप भी अपने सुझाव व् आपत्ति सरकार को सीधे भेज सकते है.

Draft Code on Wages Central Rules in Hindi

केंद्र सरकार ने Wage Code Bill 2020 को संसद में पास किया. जिसके बाद कहा गया कि इस कानून से देश के करोड़ मजदूरों का फायदा होगा. केंद्र सरकार ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा गया कि वेजेज कोड बिल के पास होते ही न्‍यूनतम वेतन अधिनियम 1948, वेतन भुगतान अधिनियम, 1936, बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 तथा समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 समाप्त हो जायेंगे. इस चारों कानूनों के प्रासंगिक प्रावधानों को वेजेज कोड बिल में शामिल किया गया है.अब इसके Rules के ड्राफ्ट जारी किया हैं. इसके लागू होते ही Wage Code Bill कानून बन प्रभाव में आ जायेगा.

अपना सुझाव व् आपत्ति कहाँ भेजें | Draft Code on Wages Central Rules

केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने Draft Code on Wages Central Rules की अधिसूचना नई दिल्ली, 7 जुलाई, 2020 को प्रकाशित कर दी. जिसका कॉपी हम इस पोस्ट के अंत में उपलब्ध करवा रहे हैं. इस पर आप अपना सुझाव व् आपत्ति प्रकाशन तारीख से 45 दिन की अवधि की समाप्ति अंदर श्री एम ए खान, उप निर्देशक ([email protected]) और श्रीमती रचना बोलीमेरी, सहायक निर्देशक, ([email protected]) भारत सरकार, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, श्रम शक्ति भवन, रफी मार्ग, नई दिल्ली-110001 के पास भेजे जा सकते हैं. इससे पहले Wage Code Rules के कुछ प्रमुख बातों पर नजर डालते हैं.

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Draft Code on Wages Rules 2020 |ड्राफ्ट वेज कोड रूल्स

ऐसे तो यह ड्राफ्ट 44पेज का हैं. मगर हम इसके मुख्य बातों को आपके सामने लेन का प्रयास करेंगे ताकि आप इसपर अपनी टिपण्णी सरकार को उपरोक्त ईमेल आईडी पर भेज सकें. मगर सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि Wage Code Bill क्या हैं और यह कैसे आपके सैलरी पर प्रभाव डालेगा?

Wage Code Bill क्या हैं? Code on wages (central) rules 2019

केंद्र सरकार द्वारा वेजेज कोड बिल 2019 के तहत श्रमिकों के जीवन स्तर को ध्यान में रखते हुए एक फ्लोर वेजेज तय करेगी. इसके अलावा, यह विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मंजिल मजदूरी निर्धारित कर सकता है. जिसके बाद कोई भी राज्य सरकार केंद्र सरकार के द्वारा तय न्यूनतम वेतन से कम न्यूनतम वेतन निर्धारित नहीं कर सकती हैं. इसके बारे में हमने पहले भी अपने आर्टिकल के माध्यम से जानकरी दी है ->Wage Code Bill 2019 की हकीकत, क्या Modi Govt ने Minimum Wages में वृद्धि की. अब हम Point wise जानते हैं कि केंद्र सरकार ने वेज कोड बिल रूल में क्या क्या प्रावधान रखें हैं?

न्यूनतम वेतन की गणना | Calculating the Minimum Rate of Wages

अब जैसा कि हमने ऊपर बताया कि Wage Code Bill 2020 के द्वारा केंद्र सरकार एक फ्लोर न्यूनतम वेतन निर्धारित करेगी. जिसको निर्धारित करने के लिए एक मजदूर परिवार को तीन इकाई जिसमें परिवार के चार सदस्य (पति-पत्नी और उसके दो नाबालिक बच्चे) होंगे. उनके ऊपर प्रति यूनिट प्रति दिन 2700 कैलोरी का शुद्ध सेवन और किराए पर 10% व्यय का प्रावधान शामिल किया गया है.

न्यूनतम का निर्धारण क्षेत्र के अनुसार (महानगरीय, गैर-महानगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों) और कर्मचारी की कौशल श्रेणी (अकुशल, अर्ध-कुशल, कुशल और अत्यधिक कुशल कर्मचारियों) किया जायेगा. इसके आलावा वर्ष में दो बार महंगाई भत्ता 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर से पहले वर्ष में दो बार करने का प्रयास किया जायेगा.

कर्मचारियों के लिए ड्राफ्ट नियम प्रति दिन न्यूनतम मजदूरी की दर तय करने के लिए मानदंड निर्धारित करता है. इसके अनुसार- (i) प्रति घर में तीन वयस्क उपभोग इकाइयाँ, (ii) प्रति उपभोग इकाई में 2700 कैलोरी की दैनिक खपत, (iii) किराए पर 10% व्यय, (iv) ईंधन, बिजली और विविध वस्तुओं का 20% व्यय, और (v) शिक्षा, चिकित्सा आवश्यकताओं और आकस्मिकताओं पर 25% व्यय का निर्धारण किया गया है.

मजदूरी की न्यूनतम दर के निर्धारण के लिए मानदंड | Norms for fixation of minimum rate of wages

मजदूरी की न्यूनतम दर तय करते हुए केंद्र सरकार चिंता भौगोलिक क्षेत्र को तीन श्रेणियों यानी महानगरीय क्षेत्र, गैर महानगरीय क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र में विभाजित करेगी. केंद्र सरकार न्यूनतम वेतन का निर्धारण के लिए एक टेक्नीकल कमेटी का गठन करेगी. जिसमें निम्न सदस्य होंगे-

(i) Chief Labour Commissioner (Central)……Chairperson;

(ii) Joint Secretary to the Government of India dealing with the wages …………… member;

(iii) A representative from the Government of India, Ministry dealing with skill development;

(iv) Director General of employment, Government of India, Ministry of Labour and Employment……member;

(v) Two technical experts in wage determination as nominated by Central Government member; and

(vi) The Deputy Secretary to the Government of India, Member Secretary of such technical committee

महंगाई भत्ते के संशोधन के लिए समय अंतराल | Time Interval for revision of dearness allowance

न्यूनतम का निर्धारण क्षेत्र के अनुसार (महानगरीय, गैर-महानगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों) और कर्मचारी की कौशल श्रेणी (अकुशल, अर्ध-कुशल, कुशल और अत्यधिक कुशल कर्मचारियों) किया जायेगा. इसके आलावा वर्ष में दो बार महंगाई भत्ता 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर से पहले वर्ष में दो बार करने का प्रयास किया जायेगा.

काम के घंटे की संख्या | Number of Hours of work

एक सामान्य कार्य दिवस का गठन करने वाले घंटों की संख्या 9 घंटे होगी. किसी कर्मचारी के कार्य दिवस को Rest आदि को सम्मिलित करते हुए, यदि वह किसी भी दिन 12 घंटे से अधिक नहीं हो होगा.

साप्ताहिक विश्राम का दिन | Weekly day of Rest

इस नियम के प्रावधानों के अनुसार एक कर्मचारी को एक हप्ते में एक दिन का आराम दिया जायेगा. जिसको Rest का दिन कहते हैं जो कि आमतौर पर रविवार को हो सकता हैं. मगर नियोक्ता सप्ताह में किसी एक दिन को किसी भी कर्मचारी या कर्मचारी को आराम दिवस के रूप में नियत कर सकता हैं.

रात की पाली | Night Shift

इस नियम के अनुसार नाईट शिफ्ट में काम करवाने के लिए अलग-अलग टर्म एंड कंडीशन दिए गए हैं. किसी कर्मचारी से नाईट शिफ्ट करवाने के लिए पहले सूचित करना होगा. इसके आलावा कर्मचारी के काम के घंटों का फैलाव किसी भी दिन 16 घंटे से अधिक नहीं होगा.

इसके आलावा लेबर इंस्पेक्टर के अधिकार को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है. उनका नाम बदलकर “Inspector-cum-Facilitator” कर दिया गया हैं. पूर्व की भांति आपकी शिकायत प्राप्त होने पर बिना सरकार के निर्देश के वो कंपनी पर छापा नहीं मार सकेंगे.

केंद्रीय सलाहकार बोर्ड

इस बोर्ड में केंद्रीय सरकार द्वारा नामित किये जाने वाले नियोक्ता व एवं कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति तथा स्वतंत्र व्यक्ति एवं राज्य के प्रतिनिधि शामिल होंगे. इस नियम के अनुसार नियोक्ता और कमचारियों के 12-12 प्रतिनिधि होंगे.

वेज कोड (Wage Code) में नया क्या हैं?

केंद्र सरकार के दावों के अनुसार वेज कोड में न्‍यूनतम वेतन अधिनियम 1948, वेतन भुगतान अधिनियम, 1936, बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 तथा समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 के प्रावधानों को शामिल किया गया हैं. अभी पूरी तरह यह स्पष्ट नहीं हैं कि जब यह कानून लागू होगा तो किस प्रकार मजदूरों के हितों के लिए खड़ा उतरेगा. हाँ, अगर न केवल सरकार ने चालाकी से 4 कानून समाप्त कर दिए बल्कि बहुत से प्रावधानों को बदल भी डालें हैं.

पहले न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के तहत त्रिपक्षीय कमेटी होती थी. जिसमें ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधि और कॉर्पोरेट्स के प्रतिनिधि होते थे.  एक तरह से मजदूरों का पक्ष जाने बिना ही उपरोक्त अधिकारी पर फ्लोर वेज (न्यूनतम वेतन) निर्धारण का दायित्व होगा. जिसको हर हाल में मजदूरों का मानना होगा. हम इसको दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि सरकार द्वारा बड़े चालाकी से मजदूरों के ट्रेड यूनियन अधिकार को समाप्ति की घोषणा कर दी गई है.

पहले के न्यूनतम वेतन के निर्धारण ही की तरह अभी Floor Wage में भी एक मजदूर परिवार के लिए तीन यूनिट (मजदूर+पति/पत्नी+2 बच्चे) यानि 4 सदस्य को शामिल किया गया हैं. इसमें कम से कम आश्रित माता-पिता को भी शामिल करना चाहिए था. आप चाहे राशन कार्ड को देख लीजिये या फिर ESIC Card को, जब उसमे आश्रित माता-पिता को शामिल किया गया हैं तो फिर न्यूनतम वेतन में क्यों नहीं किया गया? अब स्वभाविक बात हैं जब वो साथ में रहेंगे तो उनके यूनिट को भी शामिल किया जाना चाहिए था.

ड्राफ्ट रूल्स में कहा गया है कि वर्ष में दो बार न्यूनतम मजदूरी से जुड़े महंगाई भत्ते को संशोधित करने का प्रयास (Endeavour) किया जाएगा, प्रत्येक वर्ष 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर से पहले. जबकि महंगाई भत्ता जीवन निर्वाह भत्ते की लागत और आवश्यक वस्तुओं के संबंध में रियायत के नकद मूल्य (रियायत दर पर) को संदर्भित करता है. ड्राफ्ट नियम इन अंतरालों पर महंगाई भत्ते को संशोधित करने के लिए अनिवार्य नहीं बनाते हैं. अभी वर्तमान में केंद्र सरकार कृषि, खनन और निर्माण कार्य जैसे कुछ व्यवसायों के लिए औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में बदलाव के आधार पर, वर्ष में दो बार (अप्रैल और अक्टूबर में) महंगाई भत्ते में संशोधन करती है.

केंद्र सरकार द्वारा प्रकाशित ड्राफ्ट रूल्स समय-समय पर फ्लोर वेज को संशोधित करना अनिवार्य नहीं करते हैं. ड्राफ्ट नियम यह निर्दिष्ट करता है कि हर पांच साल में न्यूनतम मजदूरी को संशोधित किया जाना चाहिए. हर पांच साल में फर्श मजदूरी को संशोधित किया जा सकता है. जबकि अभी वर्तमान कानूनी ढांचे के तहत, फर्श मजदूरी (Floor Wage) को हर दो साल में संशोधित किया जाता है.

ड्राफ्ट रूल्स के अनुसार एक सामान्य कार्य दिवस में 9 कार्य घंटे शामिल होंगे. हालांकि, वे प्रति सप्ताह काम के घंटे की संख्या पर एक सीमा निर्दिष्ट नहीं करते है. यह भारत द्वारा अनुमोदित ILO कन्वेंशन का उल्लंघन कर सकता है, जिसने औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए अधिकतम साप्ताहिक कार्य समय 48 घंटे निर्धारित किया था. ध्यान दें कि वर्तमान न्यूनतम मजदूरी (केंद्रीय) नियम, 1950 यह निर्दिष्ट करता है कि सामान्य कामकाजी सप्ताह में प्रति सप्ताह 48 घंटे शामिल होंगे.

Draft Code on Wages Central Rules in Hindi से किसको फायदा मिलेगा?

हमारी राय

अगर आप हमारा राय पूछेंगे तो हम तो यही कहेंगे कि सरकार ने पुरे देश में “समान वेतन” का सपना दिखाकर मजदूरों के 4 अहम् कानून समाप्त कर दिए और इतना ही नहीं बल्कि आपके न्यूनतम वेतन निर्धारित में आपकी राय नहीं पूछी जायेगी. इसके साथ ही आपके काम के घंटे चालाकी से बढ़ा दिए गए हैं. अब आप खुद ही तय कीजिए कि Draft Code on Wages Central Rules से किसको फायदा मिलेगा?

हम तो यही कहेंगे कि हमारे पूर्वजों ने खून की होली खेल हमारे लिए ये अहम् कानून बनवाये थे. आज हमारी अनदेखी, चुप्पी के कारण फिर से हम गुलामी की तरफ बढ़ रहे है. अभी भी समय हैं, ऊपर लिखे ईमेल पर सीधे 2 लाइन लिखकर भेजिए कि “यह कानून हमें मंजूर नहीं. हम इसका विरोध करते हैं. इसको रद्द किया जाए”. इसके साथ ही इस जानकारी को अपने अधिक से अधिक साथी तक पहुंचाने के लिए शेयर करें.

Draft Code on Wage Central Rules 2020

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18 thoughts on “Draft Code on Wages Central Rules in Hindi से किसको फायदा मिलेगा?”

  1. नई वेज बिल मज़दूरों के लिए सही नहीं है
    1: कार्य की सीमा अधिक है
    2, न्यूनतम वेतन भी fiex नही है
    3, मजदूरों के मैन 4 adikarik नियम भी समाप्त करने वाले हैं
    4 ,ये नया बिल मजदूरों के हक के लिए सही नहीं है

    Reply
    • आप इसकी जानकारी सभी लोगों तक पहुंचाएं और सरकार को ईमेल करें

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  2. Sir hum is kanon ka virodh karte hai pata nahi sarkar corporate ka sath kahe deti itne kanon banne ke baad bhi to swasan ho hi raha hai uper se ye wage code to garib janta ko Mar hi degi sarkar sirf vote ke liye garib janta ke pas aati hai jitne ke bad corporator ke pas jate hai Mai central government ke office me as security guard as a contract kiya lakin humko na to kabhi minimum wage mila or to or pf ka bhi paisa gap kar ke jama kiya mere pas sara proof hai Sir.

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    • आप फिलहाल न्यूनतम वेतन के लिए अपने एरिया के लेबर कमिशर ऑफिस में शिकायत करें और दस गुना हर्जाना की मांग कर सकते हैं और पीएफ के लिए पीएफ कमिश्रर ऑफिस में शिकायत लगाए. कृपया अपना मोबाइल नंबर यहाँ वहां लिखने से बचे.

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  3. Meri sarkar se vinti hai mera case kanpur provident fund office UPmein chal raha hai Lekin koie Nyayik jaanch nahi huie hai two year past ho gaye hai Lekin Maalikon ka kahna hai ki co kar record kho gaya ya bah gaya hai To meri sarkaar se request hai sarkaar yadi chahe sahi aur Nyayik jaanch karaana chahe to Co ke balance sheets income Taxe mein Record hai usse bhi jaanch ho sakti hai aur karmchaari ko Nyay dila sakti hai sarkaar yadi chahe co thi Delhi UP Road carrier 133/224 TPNagar kanpur UP Gandhi Road Lines 133/224 TPNagar kanpur UP end co ke maalikon ne 19 year ka paissa dhokha dhari kiya jismein sarkaar ke jaanch karne wale sarkaari karmchaariyon ki miles bhagat hai jisse sahi jaanch nahi huie aur ek Worker ka bhavishya andhkaarmaya ho gaya hai Mera sarkaar se anurodh hai Uchit jaanch karwaayein Ganesh Shankar Tiwari vill khersa post Bidhnu Distt kanpur UP pin 209214 Mo 6386690844

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    • यह तो बहुत गलत हुआ. पीएफ कमिश्नर ने क्या इसपर कार्रवाई नहीं की?

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  4. Kya third party ke through kaam karne waalo ka bhi salary review hota hai
    State gov. Ka salary wages or contractor ke through kaam karne waalo ki salary alag hoti hai kyoki State gov. Employee ki minimum salary or contract basis workers ki salary dono me difference hai
    State government ke according housekeeping ki salary 10,000 se upar hai or contract par kaam karne waalo ko pf esic jaat ke 9500 ke aas paas milti hai kyo

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    • बिलकुल, आप जिस भी स्टेट गोवेर्मेंट के अंडर काम करते हैं, हम अपने ब्लॉग पर पाठकों के डिमांड के अनुसार न्यूनतम वेतन (5 वर्ष) मंहगाई भत्ता (साल में 2 बार) रिवीजन की जानकारी देते हैं. आप रेगुलर रूप से हमारे ब्लॉग पढ़ें.

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    • आप अपने ईमेल पोस्ट में बताये अधिकारी को भेजें

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  5. बैंक मित्रो को 2014 में माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने बताया था लाल किले से सभी बैंक मित्रो को 5000 फिक्स ओर अन्ये का भुकतान किया जयगा जो आज तक बैंक मित्रो को नही मिला

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    • आप बैंकमित्र के बारे में पूरी जानकारी आपकी नियुक्ति, सैलरी, काम आदि हमें लिखकर भेजें. जिसके बाद हम कोशिश करेंगे कि आपकी दिए जानकारी की सहायता से पूरा एक आर्टिकल प्रकाशित कर सके ताकि आपकी आवाज सरकार तक पहुंचे.

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    • दोस्त, माफ़ी चाहूँगा. लेबर विभाग ने वेवसाइट पर दो ड्राफ्ट अपलोड कर रखा हैं, जिसके वजह से confusion हुई. इसको उपडेट कर दिया. असुविधा के लिए माफ़ी चाहूँगा. Special Thank You.

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  6. I had a question, What if i am working in NPF (Non Profit Organization) and they want to hire a employee with Graduate and Tally specialization, what will be his minimum wages for Nasik city (Maharashtra), could you please provide me with some government documents to prove, I need central government related as the NPF comes under ministry of defense.

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    • You should contact the Regional Labour Commissioner Office (Central) for this, if your institution / company comes under their jurisdiction then you will come under the Central Government.

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  7. यह कानून हमें मंजूर नहीं. हम इसका विरोध करते हैं. इसको रद्द किया जाए”.

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