Patori Civil Court मुख्यालय से दुर मालपुर में बनने की हकीकत

Patori Civil Court – पटोरी अनुमंडल अंतर्गत बहुप्रतीक्षित व्यवहार न्यायालय बनने जा रहा है। जिसके निर्माण से पूर्व समर्थन की जगह चारो तरफ विरोध होना शुरू हो गया है। आज हम इस पोस्ट के माध्यम से पटोरी अनुमंडल मुख्यालय से 6 किलोमीटर दूर मालपुर में बनाने की हकीकत बताने जा रहें है। जिससे आप खुद ही समझ पायेंगे कि आखिर जिस व्यवहार न्यायालय को आम आदमी के पास बनाना चाहिए। आखिर उसको 6 किलोमीटर दूर मालपुर में बनाने के पीछे का हकीकत क्या है?

Patori Civil Court मुख्यालय से दूर मालपुर में बनने की हकीकत

पटोरी अनुमंडल बनने के बाद व्यवहार न्यायालय के जमीन के लिए चयन प्रक्रिया शुरू होती है। जिसके तहत श्री अमरेंद्र प्रताप शाही, माननीय मुख्य न्यायाधीश, हाईकोर्ट, पटना दिनांक 20.05.2019 को स्थल निरक्षण के लिए खुद आते हैं और उनके द्वारा पटोरी अनुमंडल कार्यालय के बगल में कृषि फार्म की भूमि को व्यवहार न्यायालय के लिए उपयुक्त बताते हुए अनुशंसा की जाती है। यही नहीं बल्कि उन्होंने मालपुर के भूमि को अनुपयुक्त बताया जाता है। जिसकी खबर विभिन्न समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुआ था।

अब सोचने वाली बात यही कि इसके बाद आखिर ऐसा क्या होता है कि चीफ जस्टिस के अनुमोदन को ख़ारिज कर पटोरी अनुमंडल मुख्यालय से 6 किलोमीटर दूर उनके द्वारा अनुपयुक्त बताये मालपुर के भूमि पर व्यवहार न्यायालय क्यों बनने जा रहा है?

पटोरी कृषि फार्म की जमीन पर बीज उत्पादन

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साजिश के तहत कृषि विभाग के संकल्प संख्या- 1289 दिनांक-18.04.2006 सरकार को भेजा गया। जिसमें बताया गया कि पटोरी कृषि फार्म की जमीन पर बीज उत्पादन किया जाता है। जिसके कारण बिहार सरकार ने खुद ही पटोरी व्यवहार न्यायालय (Patori Civil Court) के लिए कृषि फार्म की भूमि देने का फैसला बदल दिया जाता है। जिसके बाद पटोरी अनुमंडल मुख्यालय के पास दूसरा जमीन नहीं खोजकर तक़रीब 6 किलोमीटर दूर एकांत और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में व्यवहार न्यायालय बनाने की दिशा में काम शुरू हो जाता है।

बिहार सरकार के बागवानी निदेशालय ने अप्रैल 2021 के बीज प्रसंस्करण इकाई का मॉडल डीपीआर के अनुसार “बिहार में बीजों की मांग को पूरा करने के लिए विभिन्न राज्यों से मंगवाए जाते हैं। धान और गेहूं जैसी मुख्य फसलों के बीज उत्तराखंड, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से मंगवाए जाते हैं। जबकि सूत्रों के मुताबिक पटोरी कृषि फार्म की भूमि या तो खाली पड़ें हैं या कुछ किसानों को पट्टे पर दिया हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किसने और किसके कहने पर कृषि विभाग ने बिहार सरकार को झूठी रिपोर्ट भेजकर गुमराह किया?

Patori Civil Court के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका

यही नहीं बल्कि पटोरी अनुमंडल क्षेत्र के अनुज कुमार व् अन्य व्यवहार न्यायालय कृषि फार्म के भूमि पर बने इसके लिए पटना हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हैं। जिसके बाद सुनवाई के दिन अचानक गायब हो जाते हैं। माननीय कोर्ट के समक्ष उनकी अनुपस्थिति का फायदा सरकार को मिलता है और उनकी याचिका ख़ारिज कर दी जाती है। जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता फिर से अपील भी नहीं करते हैं। जिसका फायदा विपक्षी पार्टी को मिलता है और वो कोर्ट का आदेश बोलकर मालपुर में कोर्ट बनाने की बात में बल मिल जाता है।

किसको लाभ होगा

आपको एक और चौंकाने वाली जानकारी दे दें कि अभी एसआईए ने पटोरी व्यव्यहार न्यायालय के लिए भूमि अधिग्रहण का समाजिक प्रभाव पर मूल्यांक का ड्राफ्ट जिलाधिकारी समस्तीपुर को 19 जनवरी 2026 को सौपा है। जिसमें मालपुर को पटोरी अनुमंडल के पास बताया है। यही नहीं बल्कि प्रस्तावित परियोजना का मुख्य उद्देश्य पटोरी अनुमंडल एवं आसपास के क्षेत्रों की जनता को उनके निवास के पास त्वरित, सुलभ एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध करना है।

जबकि असलियत यह है कि दूसरी छोड़ पर स्थित मोहिउद्दीनगर ब्लॉक का पतसिया व् उसके सीमावर्ती गावों से से पटोरी की दुरी तकरीबन 25 किलोमीटर के आसपास है और न्यायालय मालपुर में कोर्ट बनने से यह दुरी बढ़कर 25+6= 31 किलोमीटर हो जायेगा। स्पष्ट है कि पतासिया, बोचहा, रमैया भदैया, कुरसाहा, बेड़ी-चापड़, डुमरी, बघड़ा, धमौन, शाहपुर उंडी , गोरगामा, ताराधमौन, सिरदिलपुर, सुपौल, हसनपुरसूरत जैसे तकरीबन 35 से अधिक गांव के 5 लाख से ज्यादा आवादी से न्याय 5 किलोमीटर ज्यादा दूर हो जायेगा। जबकि मालपुर में न्यायालय बनने से केवल 2-3 पंचायत के लोगों के खास फायदा मिलेगा।

पटोरी अनुमंडल व्यवहार न्यायालय दूर होने से वकील से मुवक्किल को भी सुनवाई के लिए यहां से मालपुर दिनभर दौड़ना पड़ेगा। जबकि उसके बीच में कब रेलवे फाटक बंद हो जाए और आपको कोर्ट पर समय से नहीं पहुंचने से बेल टूट कर जेल हो जाए यह कहना मुश्किल होगा। यही नहीं सुरक्षा के दृष्टि से भी मालपुर उपयुक्त नहीं है, क्योकि थाना, डीएसपी, एसडीओ पटोरी में हैं। ऐसे में आने वाले समय में आम आदमी यहां से वहां भागता रह जायेगा।

किसी तरह मालपुर में कोर्ट

यही नहीं बल्कि पटोरी व्यवहार न्यायालय मालपुर में बने इसके लिए ड्राफ्ट के अनुसार विक्रमपुर, उदापुर सरायरंजन एवं विभूतिपुर के लोगों को भी लाभ उठाना बताया है। जबकि यह क्षेत्र पटोरी अनुमंडल के अंतर्गत आता ही नहीं है। इससे खुद में साबित होता है कि कोई तो है जो चाहता है कि किसी तरह आनन फानन में मालपुर में कोर्ट बन जाए।

Patori Civil Court मुख्यालय से दुर मालपुर में बनने की हकीकत

सुरजीत श्यामल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, वर्कर वौइस् का आरोप है कि पटोरी अनुमंडल व्यवहार न्यायालय के निर्माण के लिए पास में सरकारी जमीन उपलब्ध रहने के बावजूद संबंधित पदाधिकारी के द्वारा अपने कमीशन के लिए अनुमंडल मुख्यालय से 4-5 किलोमीटर दूर आम रैयत का जमीन खरीद कर सरकार को आर्थिक क्षति पहुँचाना चाहते है।

जिसके खिलाफ शिकायत के माध्यम से चीफ जस्टिस, पटना हाईकोर्ट व् बिहार सरकार को शिकायत भेजकर जांच की मांग किया है। उनके शिकायत पर मुख्य सचिव, बिहार सरकार ने 17.01.2026 को संज्ञान में लिया है और एसीएस, सतर्कता/प्रधान सचिव, राजस्व विभाग को कार्रवाई के लिए अग्रसारित किया है, अब देखना है कि कब तक कार्रवाई की जाती है?

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