Shahpur Patori Civil Court -पटोरी व्यववहार न्यायालय मालपुर में बनाने को लेकर कल 21 फरवरी 2026 को जोड़पुरा पंचायत भवन पर लोक सुनवाई का आयोजन किया गया था। जिला प्रशासन के तरफ से आहूत इस आयोजन में SIA दल के द्वारा जारी ड्राफ्ट पर लोक सुनवाई में समस्या और समाजिक स्तर पर प्रभाव आंकलन करना था। जो कि हंगामें के बीच संपन्न हुआ और अंत में SIA दल के द्वारा महत्वपूर्ण घोषणा की गई, आइए विस्तार से जानते हैं?
Shahpur Patori Civil Court लोकसुनवाई
पटोरी अनुमंडल अंतर्गत व्यवहार न्यायालय बनाना है। जिसके लिए पटोरी मुख्यालय से तकरीबन 6 किलोमीटर दूर व्यवहार न्यायालय बनाने के लिए जिला प्रशासन के तरफ से जोड़पुरा पंचायत भवन पर लोक सुनवाई का आयोजन किया गया है। जिसमें पटोरी अनुमंडल क्षेत्र के संकडों जनप्रतिनिधि और एक हजार की संख्या में आमजन ने भाग लिया। जिसमें सभी जनप्रतिनिधियों व रैयतों ने अपनी बात रखी और SIA दल को लिखित मांग सौंपा।
अनुमंडल के तीनों प्रखंडों—मोहिउद्दीन नगर, मोहनपुर और पटोरी—के जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं ने एक साझा मंच से स्पष्ट घोषणा की कि व्यवहार न्यायालय को किसी भी परिस्थिति में पटोरी मुख्यालय से हटने नहीं दिया जाएगा। यह बयान केवल औपचारिक विरोध नहीं, बल्कि क्षेत्रीय एकजुटता का प्रदर्शन था, जिसमें सभी दलों और संगठनों ने एक स्वर में अपनी चिंता व्यक्त की।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि न्यायालय केवल एक भवन नहीं, बल्कि प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था का केंद्र होता है। इसे मुख्यालय से हटाना आम नागरिकों के लिए अतिरिक्त कठिनाइयां पैदा करेगा। उनका मानना है कि वर्षों से पटोरी मुख्यालय न्यायिक गतिविधियों का केंद्र रहा है, ऐसे में इसे किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करना व्यावहारिक और जनहित के अनुरूप नहीं है।
नेताओं ने विशेष रूप से प्रस्तावित मालपुर स्थल पर सवाल उठाए। उनका तर्क था कि भौगोलिक दृष्टि से यह स्थान उपयुक्त नहीं माना जा सकता। रेलवे लाइन की मौजूदगी के कारण आवागमन में बार-बार बाधा उत्पन्न होगी, जिससे वादकारियों, अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों को असुविधा का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है, ऐसे में परिवहन की सुगमता अत्यंत आवश्यक है।
सुरजीत श्यामल, संयोजक, नागरिक संघर्ष मोर्चा कहा कि पटोरी व्यवहार न्यायालय को अनुमंडल कार्यालय से अलग-थलग करने की एक जोखिम से भरा साजिशपुर्ण कोशिश की गयी है। जो खतरनाक भी हो सकता है, क्योंकि न्यायालय का अनुमंडल मुख्यालय सुरक्षा कवच होता है और अनुमंडल क्षेत्र का व्यवहार न्यायालय सामाजिक न्याय का ताज बिहार में अनुमंडल मुख्यालय और व्यवहार न्यायालय एक छत के नीचे है। ऐसे में माॅडल राज्य में प्रवृत्त है कि राज्य में कोई भी कारा आबादी से सुदूर इलाके में अवस्थित है, किन्तु पटोरी अनुमंडल का आधुनिक माॅडल जो जिला प्रशासन ने विकसित किया है, जिसमें न्यायालय और कारा एक छत के नीचे होंगें। जहां से अलग अनुमंडल मुख्यालय की दूरी कहीं भी हो कोई शर्त नहीं है।
उन्होंने आगे कहा कि जिला प्रशासन के द्वारा आज लोक सुनवाई की जानकारी न तो बेवसाईट पर प्रकाशित किया गया और जिला भू-अर्जन पदाधिकारी से फोन पर निवेदन करने पर अभी तक एसआईए द्वारा समाजिक मूल्यों के आंकलन से संबधित डाफ्ट का काॅपी ही आम पब्लिक के लिए पब्लिक डोमेन में डाला गया।
यह कि यही नही जबकि भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के अनुसार भूमि, चयन से लेकर कमेटी और ड्राफ्ट में भी उलंघन किया गया है। सुरजीत ने विस्तार से अपनी बात अधिकारियो को समक्ष रखते हुए अविलंब कमेटी को भंग कर पुनः नियमानुसार कमेटी का गठन कर पटोरी अनुमंडल मुख्यालय के समीप श्री अमरेंद्र प्रताप शाही, माननीय मुख्य न्यायाधीश, हाईकोर्ट, पटना दिनांक 20.05.2019 के द्वारा अनुशंसित कृषि फार्म की भूमि पर न्यायालय बनाने की मांग की।
जन सुनवाई में जिला भू-अर्जन पदाधिकारी प्रवीण कुमार, बीडीओ कुमुद रंजन, सीओ अभिषेक कुमार सहित एसआईए टीम के सदस्य उपस्थित थे। संभावित तनाव को ध्यान में रखते हुए पटोरी व हलई थाना समेत भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। लोक सुनवाई के अंत में SIA टीम के द्वारा घोषणा कि गई कि सभी रैयतों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि व्यवहार न्यायालय पटोरी के कृषि फार्म की भूमि पर बने, जिसका रिपोर्ट हम जिला पदाधिकारी को जल्द ही सौपेंगे।
Surjeet Shyamal एक श्रमिक जागरूकता लेखक हैं, जो Private Employees को PF, वेतन, ग्रेच्युटी और लेबर कानून से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सरल हिंदी में प्रदान करते हैं। उनका लक्ष्य कर्मचारियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना और सही मार्गदर्शन देना है, ताकि वे सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य जीवन जी सकें। Read More