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    Fixed Term Employment Kya hai? सरकार ने सभी क्षेत्रों में रखने की दी छूट, जाने किसका फायदा

    Fixed Term Employment Kya hai? सरकार ने सभी क्षेत्रों में रखने की दी छूट, जाने किसका फायदा
    बिज़नेस स्टैण्डर्ड के रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने सभी क्षेत्रों में Fixed Term Employment को फिर से शुरू कर दिया है. इसके तहत कहा गया है कि सभी वर्करों को रेगुलर वर्कर के तरह सुविधा प्रदान किया जायेगा. इसके साथ ही यह भी कहा गया कि Fixed Term Employment को जो कि एक ख़ास समंय सीमा के लिए निर्धारित होगा.  इसके तहत रखे गए कर्मचारी ग्रैच्युटी के लिए हकदार होंगे. जबकि अभी तक रेगुलर वर्कर को पांच साल पूरा होने के बाद ही इसका हकदार माना जाता है.
     

    कल पटना के एक साथी ने फोन भी किया है. उन्होंने इस खबर के बारे में ख़ुशी जाहिर  करते हुए कहा कि अब सरकार हमलोगों को बराबर सुविधा देने जा रही है. ऐसे हमने उनको उसी समय बता दिया कि इस फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट का फंडा क्या है. आइये इसके बारे में थोड़ा डिटेल में जानते हैं. हम आपको बिलकुल आपकी भाषा यानि बिलकुल ही सरल भाषा में जानकारी देने की कोशिश करेंगे.

    फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट क्या है Fixed Term Employment kya hai in Hindi

    Fixed Term Employment (निश्चित अवधि के रोजगार) एक रोजगार अनुबंध है जिसके द्वारा एक नियोक्ता (कम्पनी/फैक्ट्री/उद्यम ..) किसी भी कर्मचारी को सीमित अवधि के लिए भर्ती करता है. ऐसा अनुबंध केवल एक विशिष्ट, अस्थायी कार्य करने के लिए और केवल कानून द्वारा निर्धारित उन मामलों में संभव हैं. अधिकांश मामलों में यह एक वर्ष के लिए होता है, मगर कंपनी के द्वारा अपने आवश्यकता के आधार पर टर्म पूरा होने के बाद Renew (नवीकरण) किया जा सकता है. ऐसे तो यह एक  निश्चित अवधि के लिए रोजगार हैं मगर कर्मचारी को कंपनी के Payroll पर नहीं माना जाता है.

    Fixed Term Employee कैसे रखते हैं in Hindi 


    Fixed Term Employment अनुबंध के तहत, पेआउट या भुगतान अग्रिम में तय किया जाता है और तय अवधि तक कोई भी बदलाव नहीं किया जा सकता है. एक तरह से समझिये कि कर्मचारी और कम्पनी के बीच में लिखित में कॉन्ट्रैक्ट यानि अनुबंध हो जाता है. उनके बीच वह सैलरी आदि बढ़ने के लिए दवाव नहीं बना सकता है. कानून के अनुसार सालो भर यानि बारहो महीना चलने वाले कामों को Fixed Term Employment (फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट) पर नहीं दिया जा सकता है. अगर कोई मौजूदा कर्मचारी लम्बी छुट्टी पर है तो उनके बदले Fixed Term Employment (फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट) का उपयोग नहीं किया जा सकता है.

    Fixed Term Employee किस काम के लिए रखे जा सकते हैं in Hindi

    Fixed Term Employment (फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट) आम तौर पर उन नौकरियों के लिए दिया जाता है जो अस्थायी यानि कुछ समय के लिए हैं. जैसे आपके कम्पनी में Painting या बिल्ड़िंग बनाने का काम या कोई कुछ समय के लिए Project का काम है, आपके कम्पनी को उस काम की देखरेख के लिए एक सुपरवाइजर की जरुरत है. इस काम के लिए Fixed Term Employment पर Employees एम्प्लाइज रखे जा सकते हैं, क्योकि कम्पनी के Paint आदि का काम कुछ तय अवधि में समाप्त हो जायेगा. मगर कम्पनी के का Core Activity (मुख्य गतिविधि) यानि Production (उत्पादन) से सम्बंधित कामों में Fixed Term Employees नहीं रखे जा सकते हैं. जैसे किसी कम्पनी का कस्टमर केयर, ऑपरेशनल वर्क, गार्ड, सफाई कर्मचारी, क्लर्क, इत्यादि. ऐसे Fixed Term Employment के द्वारा Data Entry Operator को रखा जा सकता है. मगर केवल Post दिखाकर Operation यानि Lower Division Clerk का काम लिया जाता है. वह सरासर कानून का उललंघन है.

    क्या Fixed Term Employee को Permanent किया जा सकता है? 

    भारत में बहुत सारी कंपनियां हैं जो एक वर्ष के लिए अनुबंध पर एक व्यक्ति को रखता है और टर्म पूरा होने के बाद उनको Permanent कर लेता है. इसके लिए आपको कहीं और नहीं जाना होगा बल्कि रेलमंत्रालय का Psu आईआरसीटीसी ने अभी फरवरी में ही 11 फिक्स्ड टर्म कर्मचारी को परमानेंट किया है. इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें.

    Fixed Term Employee को कितने दिनों तक अधिकतम रखा जा सकता है?

    यह कंपनी पर Depend करता है कि वो चाहे तो Permanent करें या न करें. अगर आप उनके सगे सम्बन्धी हो तो यह काम आसानी से हो जाता है. इसके आलावा अगर आपके यूनिटी में दम हो तब भी उनको Permanent करना पड़ता है. CBSE, नई दिल्ली के 108 वर्कर ने वर्षों आंदोलन के बल पर खुद को Permanent करवा लिया था. 

    Fixed Term Employee को Regular Worker के बराबर सुविधा देना अनिवार्य है?

    मगर ऐसे भी लाखों उदाहरण है जिसमें पिछले 10-30 वर्षों से कर्मचारी लगातार Fixed Term Employment के रूप में काम कर रहे हैं. मगर सरकार के दाबो के ठीक उल्ट पीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी, बोनस आदि की सुविधा नहीं दी जारी है. इसके लिए बिहार के नियोजित शिक्षक, दिल्ली एक डीटीसी वर्कर, एमसीडी के एंटी मलेरिया वर्कर आदि Fixed Term Employment का उदाहरण ही हैं. इनकी सेवा हर एक साल -छः महीने पर Renew कर दिया जाता है. इसके आलावा अगर आप किसी विभाग में Outsource/Contract Worker के रूप में रखा गया है तो अपना Appointment Letter देखिएगा. उसपर भी आपको "Fixed Term Employment/Contract" ही लिखा होगा.
     

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के वावजूद "Equal Pay" क्यों लागु नहीं हुआ?

    कभी-कभी तो यह भी देखा गया है कि कम्पनी खुद ही कर्मचारियों को नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर कर्मचारी को नियुक्त करती है मगर बाद में कर्मचारी के साथ धोखा करते हुए फर्जी ठेकेदार का अप्पोइन्मेंट लेटर थमा देती है. अभी केंद्र सरकार के बातों को प्रचार करते हुए मिडिया ने कहा कि Fixed Term Employees को Regular/Permanent Employees के बराबर सुविधा मिलेगी. उनसे जाकर पूछिए कि यह प्रावधान तो Contract Labour (Regulation & Abolition) Act, 1970 & Rules 1971 के Section 25(2)(v)(a) में ही है और तो और 26 अक्टूबर 2016 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी बराबर काम लेकर "समान काम समान वेतन" न देना असंवैधानिक बताया है. यह फैसला सभी तरह के वर्कर पर लागू होता है. इसके बाद खुद मैंने दिल्ली हाई में जनहित याचिका के माध्यम से भी Contract Labour (Regulation & Abolition) Act, 1970 & Rules 1971 के Section 25(2)(v)(a) के कानून और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागु करने के लिए  Guideline बनाने का मांग उठाई थी. मगर इसके बाद केंद्र सरकार ने समान वेतन लागू करने के बजाय केवल न्यूनतम वेतन बढ़ाकर इतिश्री मान लिया.अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

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    Fixed Term Employment में टर्म पूरा होने पर कोई Benefit नहीं मिलेगा.

    इसके तहत कर्मचारी को कभी भी 2 हप्ते का नोटिस देकर निकाला जा सकता है. जबकि अभी तक नौकरी से निकालने के लिए कानूनन  एक महीने का  नोटिस देने का प्रावधान है. इसके साथ ही नौकरी से निकालने के लिए कारण बताते हुए सभी बेनिफिट देना होता है. कॉन्ट्रैक्ट वर्कर को भी नौकरी से निकालने के लिए सभी प्रक्रिया (Show cause, Charge-sheet आदि) परमानेंट वर्कर के तरह पूरी करनी होती है. अगर इससे आप संतुष्ट नहीं है तो इसके खिलाफ कोर्ट जा सकते हैं. मगर नए कानून के अनुसार Fixed Term Employment में Term पूरा होने पर कम्पनी बिना कोई Benefit दिए बिना सीधा फायर (नौकरी से निकलेगी) करेगी. उसके बाद आपके पास Court जाने का Right  नहीं होगा.


    पहले भी कानून था कि लगातार चलने वाले में Fixed Term Employment के तहत अस्थाई कर्मचारी की न्युक्ति नहीं कर सकते हैं. हमें केवल यह बता दीजिये कि किस विभाग ने कानून का पालन किया, जो अब करेंगे? एक तरह से Fixed Term Employment से Permanent Post पर भर्ती बंद हो जायेगी. हर जगह धीरे-धीरे Fixed Term Employment तहत Contract Worker की भर्ती की जायेगा. बिना किसी क़ानूनी डर के जब मन हुआ रख लिया और जब मन हुआ निकाल दिया.

    अब आप सोच रहे होंगे कि सरकार को इससे क्या फायदा है? यह हो सकता है कि इस Fixed Term Employment के वजह से आपको नौकरी मिल जाए. इसमें आपको न्यूनतम वेतन भी दे दे तो गनीमत है. अभी बिहार या किसी अन्य राज्य में रेलवे स्टेशन पर टिकट खिड़की पर नए Contract Worker मात्र 5-6 हजार रूपये में काम करते दिख जायेंगे. अगर ऐसे में कोई शिकायत करेगा तो उसको नौकरी से निकलना आसान हो जायेगा. इससे कर्मचारियों का शोषण और बढ़ेगा.

    Fixed Term Employment के विरोध में Central Trade Union का 2 अप्रैल 2018 को देशव्यापी विरोध

    सेन्ट्रल ट्रेड यूनियन वाले इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार आगामी 2 अप्रैल 2018 को देशव्यापी विरोध करने सड़क पर उतरेंगे. उनका भी कहना है कि कॉन्ट्रैक्ट का विकल्प मिलने के बाद कोई भी कंपनी रेगुलर कर्मचारी की भर्ती क्यों करेगा. अगर इस पुरे पोस्ट को पढ़ने के अगर आप के बारे में समझ गए तो अपने साथियों को जरूर बतायें. इसके साथ ही इसको अधिक से अधिक शेयर करें, नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब हम केवल कम्पनी के गुलाम बन कर भी नौकरी नहीं बचा पायेंगे.
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    2 comments:

    1. सराहनीय कार्य सर

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      1. धन्यबाद योगेश जी, उम्मीद करूंगा कि इसके बारे में अधिक से अधिक लोगों तक जानकारी पहुचायेंगे.

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