सुप्रीम कोर्ट में Delhi Minimum Wages वृद्धि के लिए अपील के लिए सुझाव पत्र भेजा

Delhi Minimum Wages
Delhi Minimum Wages
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली सरकार द्वारा मजदूरों के 37% वेतन वृद्धि के नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया. जिसको सरकार ने गंभीरता से लिया है. आज के मुख्य समाचार पत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में अपील के लिए मीटिंग चल रही है. इसी के सन्दर्भ में हमने भी दिल्ली के मुख्यमंत्री महोदय को Delhi Minimum Wages के लिए कुछ सुझाव ईमेल किये हैं. जिसके बारे में बताने जा रहे हैं.

Delhi Minimum Wages वृद्धि के लिए अपील

दिल्ली के मजदूरों के काफी मांग के बाद दिल्ली सरकार ने 33 फीसदी न्यूनतम वेतन (Delhi Minium Wages) में वृद्धि की थी. जो कि दिल्ली के मालिकों को रास नहीं आता है. जिसके बाद वो इसको दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती देते हैं. जिसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने उस नोटिफिकेशन को असंवैधानिक बता रद्द कर दिया. जिस आदेश को दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने जा रही हैं. इसके बाद हमने सरकार को सेन्ट्रल स्फीयर को 42 फीसदी न्यूनतम वेतन वृद्धि को आधार बनाने का सुझाव दिया हैं. हमारे ईमेल को आप खुद ही पढ़ सकते हैं.

दिल्ली न्यूनतम वेतन के लिए सुझाव पत्र

सेवा में,

माननीय मुख्यमंत्री,
दिल्ली सरकार,

विषय: दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा मजदूरों के 37% न्यूनतम वेतन वृद्धि का नोटिफिकेशन रद्द किये जाने के विरुद्ध अपील के लिए सुझाव.

महाशय,

आपकी सरकार ने मार्च 2017 में दिल्ली के मजदूरों का न्यूनतम वेतन (Delhi Minimum Wages) 37% वृद्धि किया. जो कि आपके सरकार की बहुत बड़ी उपलब्धि है. मगर विगत शनिवार को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उक्त नोटिफिकेशन को 2 वर्ष के बाद संविधान के विरुद्ध बताकर रद्द कर देना दुर्भागपूर्ण हैं. आपके सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन वृद्धि 37% की लड़ाई का पूर्ण समर्थन करता हूँ. इसके साथ ही आगे की लड़ाई के लिए कुछ अन्य पहलुओं पर भी ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ.

नियोक्ताओं ने एकमत से दिल्ली सरकार के तीन मार्च, 2017 को जारी न्यूनतम वेतन की अधिसूचना को ख़ारिज करने की मांग की थी. व्यापारियों का कहना है कि समिति ने उनका पक्ष जाने बिना ही फैसला ले लिया.

हाईकोर्ट का यह भी कहना था कि ‘दिल्ली में न्यूनतम वेतन की दर को इसलिए नहीं बढ़ाया जा सकता क्योंकि दिल्ली में वेतन दर पड़ोसी राज्यों से ज़्यादा है. जबकि दिल्ली सरकार द्वारा तय की गई न्यूनतम मजदूरी भी खुद सरकार के वेतन आयोग द्वारा एक परिवार के गुजारे के लिए तय की गई आवश्यक न्यूनतम रकम के मुक़ाबले बहुत कम थी.

मैंने पुरे देश के सेन्ट्रल गवर्नमेंट के ठेका वर्कर के लिए सामान काम का सामान वेतन को लागू करवाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका संख्या W.P.(C.) 2175/2014) दायर किया था. मेरे जनहित याचिका का फैसला (दिनांक 11 मई 2017) के ठीक 15 दिनों के बाद (दिनांक 28 मई 2017) ही भारत सरकार ने सेंट्रल गवर्नमेंट के अंतर्गत काम करने वाले पुरे देश के ठेका वर्कर के लिए न्यूनतम वेतन में 42फीसदी की वृद्धि की है.

सरकार के आदेश के बाद न्यूनतम वेतन 9,000/- प्रति माह से बढ़ाकर अकुशल कर्मियों का न्यूनतम वेतन 13,936 /- अर्ध-कुशल कर्मियों के 15,418/- कुशल कर्मचारियों के लिये 16,978/- अत्यधिक कुशल यानि स्नातक 18460 किया गया. उक्त अधिसूचना के आधार पर सभी वर्करों के लिए 20 अप्रैल 2017 से बेनिफिट दिया गया है. 2013 के सरकारी आंकड़े के मुताबिक इसका बेनिफिट लगभग देश के 20 लाख+ ठेका वर्कर को मिला है.

मुझे उम्मीद है कि सेन्ट्रल गोवेर्मेंट के इस नोटिफिकेशन को आधार बनाकर आप मजदूरों का पक्ष माननीय सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से रख कर न्याय दिला पायेंगे.

धन्यबाद,
सुरजीत श्यामल,

सुरजीत श्यामल बनाम भारत सरकार दिल्ली हाई कोर्ट जनहित याचिका का आर्डर
Central Government Minimum wages 20 April 2017

उम्मीद करूंगा कि इस पत्र को सोशल मिडिया या अन्य माध्यमों से आप एक-एक वर्कर तक पहुंचने में मदद करेंगे.

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By Admin

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2 comments

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    workervoice.in/2017/12/Minimum-wages-24000-Viral.html

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