Labour Court Me Case करते समय इन बातों का ध्यान रखे तो जरूर जीत मिलेगी

अगर आप एक कर्मचारी है। ऐसे में अगर आपका मालिक/कंपनी से नौकरी संबधी विवाद होता है। अगर आपको नौकरी से निकाल दिया जाता है। ऐसे में आपको Labour Court me Case करना पड़ता है।  जिसमें आपको संबंधित लेबर कमिश्नर ऑफिस के मार्फ़त (Through) शिकायत करना होता है। अगर आपको पूरा प्रोसेस की जानकारी हो तो आपको केस लड़ने में काफी आसानी होगी। अगर आप Labour Court Me Case करते समय इन बातों का ध्यान रखेंगे तो आपको जीत अवश्य मिलेगी।

labour court me case kaise kiya jata hai

हमने अपने पूर्व के आर्टिकल (labour court me case kaise kiya jata hai) के माध्यम से बताया है। जिसको आपने पहले पढ़े लें। दोस्तों, लेबर कोर्ट में केस लड़ना काफी लम्बी प्रक्रिया है। जिसके लिए आपको काफी धैर्य की जरूरत है। अगर आप चाहेंगे कि आप हमने केस किया और कल कोर्ट फैसला दे दे तो ऐसा नहीं हो सकता है। मगर आप कुछ महत्वपूर्ण Points ध्यान में रखेंगे तो आप काफी नुकसान उठाने से बच जायेंगे, या यूँ कहें कि अकसर एक मजदूर/कर्मचारी यही गलती कर देते हैं। जिससे उनको हार का सामना करना पड़ता है या उनको जीतने में मुश्किल का सामना करना पड़ता है।

Labour Court में केस करते समय इन बातों का ध्यान रखे

आपका भले ही चाहेंगे कि Labour Court जल्दीसे जल्दी फैसला दे दे, मगर दूसरी तरह आपका मैनेजमेंट/मालिक देर करना चाहेगा। वह आपको थकाने का हर संभव कोशिश करेगा। वह चाहेगा कि आप केस छोड़कर भाग जाए। मगर आप अगर उसके झाँसे में नहीं आये और अपनी बात सही तरीके से कोर्ट के सामने रख पायें तो कल आपकी ही जीत होगी। जिसके लिए आपको कुछ बातों का ध्यान में रखना होगा। जो कि निम्न प्रकार से है-

1. आपमें कोर्ट में लड़ने के लिए धैर्य

अब अगर आप Labour Court जाने का मन बना चुके हैं तो केस लगाने के बाद धैर्य रखना होगा। ऐसे तो अलग-अलग प्राधिकरण (Labour Commissioner to Labour Court) के पास समय सिमित कर रखा गया है. मगर फिर भी आपके फैसला होते होते 1-2 साल लग सकता हैं। हाँ, यह कोई फिक्स नहीं है इसमें आपको कुछ ज्यादा वक्त भी लग सकता हैं। ऐसे में आपकी जीत तभी होगी जब आप अंत तक लड़ेंगे। अगर आप बीच मैदान में लड़ाई छोड़कर भागे तो आपको कुछ नहीं मिलेगा। आपको केस लगाने से पहले खुद के अंदर झांक के देखना चाहिए कि क्या आप लेबर कोर्ट की लम्बी प्रक्रिया के लिए तैयार हैं?

2. अपने मैटर का अप्लीकेशन

आपका जब भी मालिक/कंपनी के साथ नौकरी के संबंध में कोई भी वाद-विवाद होता है. ऐसे में आपको Labour Court का सहारा लेना पड़ता है। अब जब आपका मामला संबंधित लेबर कमिश्नर या लेबर कोर्ट के पास जाता है। ऐसे में आपके Labour Court एप्लीकेशन के आधार पर ही कोर्ट तक आपकी बात पहुँचती है। आपने उसमें कब क्या लिखा है। इससे ही आपके हार जीत की संभावना बनती है। आप जब भी कोई एप्लीकेशन हस्ताक्षर करें तो ठीक से पढ़कर और सोच समझकर करें। अपनी बात को स्पष्ट और सिलसिलेवार ढंग, पैरावाइज से लिखने का प्रयास करें। आपके हर पैरा में लिखे बातों का सबूत अगर कोई हो तो उसको नंबरवाइज संलग्न करें।

3. अपने केस का फाइल

आप जब भी अपना केस लेबर कोर्ट में लगाए तो सबसे पहले दिन से ही अपने घर पर एक फाइल बना लें। जिसमें आपके सभी सभी Original Document का कॉपी संभाल कर रखें। इसको गलती से भी किसी को न दें। आप इसका फोटो कॉपी करवाकर ही कोर्ट आदि में फाइल करें। आपका जब कोर्ट में गवाही होगा तो टेंडरिंग में आपको कोर्ट के सामने Original Document दिखाना होगा। इसलिए आपको हर हाल में अपने केस से संबंधित सभी Original Document संभाल कर रखना होगा।

4. सही वकील का चुनाव

अगर आप चाहें तो खुद से अपना केस लेबर कोर्ट में लड़ सकते हैं या फिर किसी वकील को हायर कर सकते हैं। ऐसे में आप अपने वकील का चुनाव करते समय सावधानी बरतें। आपका जब भी कोर्ट का डेट हो अवश्य जाएं। आप जब कोर्ट में मुस्तैद रहेंगे तो लेबर कोर्ट के पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) के ऊपर भी एक तरह का दवाब रहता है। आपको जब कोर्ट की बातें समझ में न आये तो तो अपने वकील से पूछें। आप समय-समय पर अपने मैटर के बारे में Discuss कर ही पेपर तैयार करवायें। यह ध्यान रहे कि आपके मैटर को आपसे ज्यादा कोई नहीं जनता है।

5. मालिक से समझौता

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आप जैसे ही लेबर कमिश्नर ऑफिस/Labour Court में शिकायत करेंगे। वैसे ही आपके मालिक/कंपनी वाले आपको डराने की कोशिश करेंगे कि तुम हमसे जीत नहीं पाओगे। हम तुम्हें झूठे केस में फंसा देंगे नहीं तो केस वापस ले लो। यही नहीं जब आप नहीं मानेंगे तो वो कहेंगे कि तुम्हारा कितना पैसा है? आकर हिसाब कर लो। अब ऐसे में आप सोचेंगे कि चलो चलकर पैसे ले लेते हैं। अब अगर आप पैसे लेने जायेंगे तो वो आपसे समझौता पर हस्ताक्षर करवा लेंगे कि हमने इसका बकाया पूरा पैसा दे दिया। जिसके बाद आपको कुछ पैसे देकर बांकी बाद में आकर ले जानें के लिए कहेंगे। जो पैसा आपको कभी नहीं देंगे।

अब ऐसी स्थिति में सोच समझकर कोई भी कदम उठायें। अब जब आप एक बार केस लगा दें तो कोशिश करें कि अगर समझौता हो तो लेबर कमिश्नर/लेबर कोर्ट के पीठासीन पदाधिकारी के समक्ष ही हो। जब भी आप समझौता का पैसा लें तो चेक में ही लें। जिससे आपके पास प्रमाण रहे।

Labour Court Me Case करते समय इन बातों का ध्यान रखे तो जरूर जीत मिलेगी

दोस्तों, यह कुछ Basic Points थे। जिसको कुछ लोगों ने इग्नोर किया। जिससे उनको परेशानी का सामना करना पड़ा। अगर आपको यह सब पहले से पता होगा। ऐसे में आपको जीत के लक्ष्य तक पहुँचने में आसानी होगी। उम्मीद करूँगा कि यह आपके लिए काफी उपयोगी होगा। आप इसको हर कर्मचारी मजदूर साथी तक पहुँचाने के लिए अधिक से अधिक शेयर करेंगे।

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2 thoughts on “Labour Court Me Case करते समय इन बातों का ध्यान रखे तो जरूर जीत मिलेगी”

  1. can i file a case in labour court, our company goes for insolvency in m/o march-2018, i regined in system in m/o Oct.2018, but HR manualy update 31-may-2018, and in EPF portal as 31-may-2018, i unable to withdraw gratuity and PF.

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    • हाँ, पहले आप अपने रिकॉर्ड के अनुसार क्लेम करें और फिर न दे तो लेबर कमिश्नर ऑफिस में शिकायत करें।

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