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    सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली के मजदूरों का न्यूनतम वेतन केस लिस्टेड

    Minimum Wages in Delhi Supreme court

    आज सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 8 और आईटम नंबर 21 में दिल्ली न्यूनतम वेतन की सुनवाई होनी थी. जिसमें माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 31 अक्टूबर 2019 को दिल्ली सरकार को तीन महीने के अंदर नया न्यूनतम वेतन रीफिक्स करने का आर्डर दिया था. जिसके बाद दिल्ली सरकार ने दिल्ली का नया न्यूनतम वेतन फिक्स कर लिया हैं. जिसके बाद माननीय कोर्ट को तय करना हैं  कि यह न्याय संगत है या नहीं.
     

    दिल्ली के मजदूरों का न्यूनतम वेतन का केस 

    आज पहले की तरह मैं समय से कोर्ट पहुंच गया. कोर्ट जल्दी पहुंचने के चक्कर में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने रेड लाइट जम्प बोल पकड़ लिया. जबकि मैंने रेड लाइट जम्प नहीं किया था और ऐसा कभी करता भी नहीं हूँ. खैर, उनको बताया तो उन्होंने 100 रुपया का चालान किया, जल्दी कोर्ट पहुंचने के चक्कर में पैसे देना उचित समझा. खैर कोर्ट कैंपस में पंहुचा गया. मेरे पास कोर्ट का पास नहीं था इसलिए कैंपस में ही पेड़ के नीचे बैठ गया.
     

    आज पूरी उम्मीद थी कि अंतिम सुनाई होगी और हम मजदूरों के पक्ष में फैसला आयेगा. जिसके बाद दिल्ली में प्राइवेट फैक्ट्री, दूकान, होटल, रेस्टोरेंट. सिनेमा और राज्य सरकार के किसी विभाग में ठेका या आउटसोर्स वर्कर की सैलरी 37% बरकार रहेगी. 

    सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के बाद दिल्ली सरकार जो नया न्यूनतम वेतन का फाइल कोर्ट में जमा किया हैं. उसके अनुसार दिल्ली में काम करने वाले मजदूरों का न्यूनतम वेतन त्रिपक्षीय कमिटी (ट्रेड यूनियन प्रतिनिधि, मालिक प्रतिनिधि व् लेबर विभाग) न्यूनतम वेतन सलाहकार समिति (Minimum Wages Advisory Board) के द्वारा तय किया गया हैं.

    दिल्ली के न्यूनतम वेतन सलाहकार समिति के सिफारिश के अनुसार -

    • अकुशल श्रेणी के लिए 14842 रुपए प्रतिमाह,
    • अर्ध कुशल श्रेणी के लिए 16341रुपए प्रतिमाह
    • कुशल श्रेणी के लिए 17991 रुपए प्रतिमाह
    • उच्च कुशल या स्नातक या उससे अधिक के लिए 19572 रुपए प्रतिमाह तय किया गया हैं.
    तक़रीबन 12:30 बजे जब पता किया तो उस समय कोर्ट नंबर 8 में आईटम नंबर 4 की सुनवाई हो रही था. इस बीच कुछ काम से दिल्ली हाई कोर्ट जाना था. दुबारा जब लौटा तो तीन बजे के आसपास आईटम नंबर 13 की सुनवाई चल रही थी. उसी समय लग गया कि आज हमारे केस का सुनवाई होना संभव नहीं हैं. उसके बाद घर लौट आया. 

    जिसके बाद शाम को सुप्रीम कोर्ट का वेवसाइट चेक ने अगली सुनवाई 29 जुलाई 2019 दिखाया. जिसका उपडेट आपको अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से दिया. जिसके बाद आप लोगों की बहुत सारी प्रतिक्रिया आनी शुरू हो गई. 

    सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली के मजदूरों का न्यूनतम वेतन केस लिस्टेड 



    अब कब होगी सुनवाई? 

    मगर उसके एक घन्टे के बाद अब सुनवाई की तारीख 24 जुलाई 2019 यानी कि कल का दिखा रहा. यह हम सभी के लिए Good News है. आपके कंपनी मालिक कुछ और सोच रहे होंगे.

    कुछ लोगों ने गुस्से में लिखा कि कुछ नही होगा, डेट पर डेट...आदि..आदि... इससे पूछता हूँ कि भाई कहाँ से घर बैठे इतना निगेटिव ज्ञान लाते हैं.

    आइये कल सुप्रीम कोर्ट में डेट पर 45℃ धूप में, हमारी तरह धक्के खाइये. एक दिन छुट्टी कीजिये 5-6 सौ का दिहाड़ी कुर्बान कीजिये और 100 रुपया का पेट्रोल फुकिये. इतना तो अपने लिए कर ही सकते हैं. अब भले ही इसका लाभ मुझे न मिले मगर फिर भी मैं जाता हूँ. मैंने खुद से वादा किया है कि अपने मजदूर साथियों के लिए मुझ से जो होगा करूँगा.

    आपके  नौकरी करने से सरकार ने न्यूनतम वेतन नहीं बढ़ा दिया, बल्कि मजदूरों के लम्बी लड़ाई का नतीजा हैं. इसके लिए कितनों ने लाठी खाई और कितनो के पेट पर लात पड़ा होगा, तब जाकर सरकार किसी की मांग सुनती हैं. अगर मेरी बातों से यकीं नहीं आये तो जानकर पूछिए कैट्स एम्बुलेंस वाले वर्कर्स से जो अपने तीन महीने के काम किया हुआ सैलरी के लिए धुप में अपने परिवार सहित पिछले दो महीने से मुख्यमंत्री आवास, दिल्ली के बाहर सड़क पर हैं. 

    मैं खुद 2013 से 2017 तक अकेले भागा, लड़ा दिल्ली हाईकोर्ट में PIL लगाकर. देश के लाखों ठेका वर्कर साथियों के लिए और सेंट्रल गवर्नमेंट ने न्यूनतम वेतन 40% बढाया. आज दिल्ली सरकार भी उसी को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट में राहत पाया है.
     


    दोस्त, क्रांति जागरूकता से ही आयेगी. इसलिए सभी को कहता हूँ कि सीखिये और सिखाइये..किसी के भरोसे न रहें. पिछले 6-7 साल से केवल और केवल मजदूर वर्ग के लिए निस्वार्थ भाव से काम कर रहा. हमेशा पॉजिटिव सोचता लड़ता हूँ बहुत ताकत मिलती है. आप भी सोच बदलो देश बदलेगा.

    6 comments:

    1. नई दिल्ली: मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में हालांकि सरकारी कर्मचारियों को निराश किया है। वहीं, दूसरी ओर निजी क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए मोदी सरकार ने खुशियों की सौगात दी है। सरकार ने न्यूनमत मासिक सैलरी को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कहा है कि र्मचारियों को उनके काम के बदले न्यूनतम वेतन देना आवश्यक है और जिन कंपनियों के खिलाफ इस संबंध में शिकायतें आएंगी, उनकी जांच करायी जाएगी और मानकों का पालन नहीं करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। New wage 18k se 24k announce hua.....is this true or not sir please update

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    2. कल एक न्यूज पढ़ने में आया. उसके बाद देखते-देखते वायरल हो गया. इसके बाद जिस भी वेव पोर्टल पर देखिए वही खबर और वह खबर यह है कि "मोदी सरकार के नये आदेशों के बाद अब प्राईवेट कंपनियों में काम करने वाले किसी भी कर्मचारी की सैलरी 24 हजार रुपये महीने से कम नहीं होगी" कल ही कई साथी ने न्यूज का लिंक शेयर किया और इसकी सत्यता बताने को कहा. उसके बाद से ही खोजबीन में लगा हूँ. हमारे पास तो जानकारी हाथ लगी, वह इस पोस्ट के "प्राईवेट कर्मचारियों की सैलरी 24 हजार महीना से कम नहीं : मोदी सरकार | सच में" माध्यम से शेयर करने जा रहा हूँ. https://www.workervoice.in/2019/07/private-employees-salary-not-less-then-24-thousnad-modi-sarkar.html

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    3. Surjeet Ji apke pass court pass nhi tha to ap mujhse bolte main apko court pass bnwa ke de deta.. next time kabhi v koi v jarurt ho to chote bhai ko jarur yaad krna.. apka work sarahniy hai hm sb apke sath hai… Advocate Yugesh Dwivedi, Mobile - 8285964353.

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    4. क्या 7 तारीख को असंगठित मजदूरों के केश की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी?

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      1. Sorry ..आपके कमेंट का जवाव देने में देरी हुआ. अगली सुनवाई २० अगस्त निर्धारित हैं.

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