घर पहुँचने की जद्दोजहद में 9 दिन से पैदल चल रहे हैं ये मजदूर

मजदूर राजेश यादव के पैर में फोले पड़ गए हैं, जिनमें से खून रिस रहा है. उसका साथी प्यारेलाल बदहवास है और भी मजदूरो की यही हालात हो रही है फिर भी चिलचिलाती धूप घर पहुँचने की जद्दोजहद में 9 दिन से पैदल चल रहे हैं ये मजदूर. राजेश और उसके दस साथी पैदल पैदल अहमदाबाद गुजरात से दमोह जा रहे हैं.

पैदल चल रहे हैं ये मजदूर

पीएम मोदी ने कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 24 मार्च को सम्पूर्ण लॉक डाउन की घोषणा की थी. इस लॉक डाउन में सबसे ज्यादा मजदूर प्रभावित हुए. सरकारी मदद के दावों की बीच हालात इस कदर बदहाल हैं कि मजदूर आज भी सैकड़ो किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर हैं.

शनिवार दोपहर को इंदौर भोपाल हाइवे पर ऐसे ही मजदूरों का एक दल पैदल पैदल अपने गांव के लिए जा रहा था. चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि अहमदाबाद गुजरात की एक केमिकल फैक्ट्री में मजदूरी का काम करते थे. लॉक डाउन में फेक्ट्री बन्द हो गई और उन्हें घर जाने का बोल दिया गया.

यातायात के सभी साधन बंद है, बस, ट्रेन सभी ठप हैं कोई सरकारी मदद भी नही मिल रही है. इसलिए अहमदाबाद गुजरात से पैदल पैदल अपने दमोह के लिए चल रहे हैं.

इस दल में 11 मजदूर हैं जो 26 मार्च से पैदल चल रहे है.

मजदूर प्यारेलाल यादव ने बताया कि हम सभी मजदूर दमोह जिले के रहने वाले हैं. अहमदाबाद में मेघमनी अल्फानील फैक्ट्री में काम करते थे. लॉक डाउन में हमे भगा दिया गया और वेतन भी नही दिया गया. वो लोग 26 मार्च से पैदल चल रहे हैं पैदल चलते चलते 10 दिन हो गए पर उन्हें कोई भी सरकारी मदद नही मिली.

रास्ते मे किसी भी वाहन चालक ने अपने वाहन में नही बैठाया. अभी तक यह मजदूर 600 किमी चल चुके हैं. जबकि इनका सफर 1000 किमी का है. मजदूर रामसिंह का कहना है कैसे भी हम घर पहुंच जाए कभी बड़े शहर में नही जायेंगे.

पैर से निकलता खून, फिर भी चलने को मजबूर

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मजदूर राजेश यादव के पैर में चल चल कर छाले पड़ गए है. मजदूर प्यारेलाल ने चल चल कर पैरों की उंगलियों सूज गई हैं. बड़े बड़े फोड़े पड़ गए हैं, जिनमे खून बह रहा है फिर भी चलने को मजबूर हैं. बताया कि वह रोजाना 40 से 50 किमी पैदल चलते हैं. सड़क किनारे सो जाते हैं और समाजसेवी लोग खाना देते हैं तो खा लेते हैं.

कोई बिस्किट देता है तो कोई फल ऐसे ही भूख गुजारा चलता है. प्यारेलाल के बताया की हम लोग बीते 10 दिनों से नही नहाए हैं.

मजदूर राजेश यादव का कहना हैं कि इस दर्द से अच्छा है कि कोई हमे जेल ही भेज दे. इस कड़ी धूप में हम पैदल चल रहे है पर हमें कोई मदद नही मिल रही. गुजरात और मध्यप्रदेश के इतने शहरों से चल कर हम यहाँ तक पहुँचें हर जगह रास्ते में पुलिस मिली.

हमने सभी से मदद की गुहार लगाई पर हमें यातायात के साधन की कोई व्यवस्था नही की गई. हमारे साथ मारपीट भी की गई, पर किसी ने मदद नही की. सूचना मिलने पर सीहोर पुलिस ने मजदूरों को भोपाल सीमा तक वाहन से छोड़ा.

लेखक: कपिल सूर्यवंशी

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