Karnauti Vaishali Hatyakand – समाज के लोगों के नाम एक बेटी के बाप का खुला पत्र

अभी हाल ही में बिहार में Karnauti Vaishali Hatyakand ने आपकी तरह मेरे भी मन को झकझोर दिया है। पिछले कई दिनों से ठीक से सो नहीं पा रहा हूँ। अपने गाँव में फोन लगाकर किसी ने किसी से इस घटना की जानकारी लेते रहता हूँ। यह घटना मेरे घर से मात्र 10 किलोमीटर की दुरी पर घटी है। जबकि लड़की के पिता का कोचिंग मुश्किल से 1 किलोमीटर की दूरी पर होगा। ऐसे तो हर रोज कहीं न कहीं बेटियों के साथ अन्याय की खबर आते ही रहती है। मगर इस घटना में समाज के पढ़े-लिखे लोगों का एक अलग ही चेहरा दिख रहा है। जिसके लिए एक खुला पत्र (Open Letter) लिखने पर मजबूर हो गया हूँ।

Karnauti Vaishali Hatyakand (Open Letter)

नमस्कार,

अगर आपको देश की हर बेटी में अपनी बेटी दिखती है तो इस पत्र को पढ़ने और चिंता करने की जरूरत है. आपसे अनुरोध करूँगा कि 2 मिनट समय निकाल कर जरूर पढ़ें और अगर आपको लगे कि यह बात देश के अन्य लोगों तक पहुँचें तो शेयर जरूर करें।

अभी हाल ही में महनार की बेटी और पटोरी की छात्रा की कुछ अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी। जिससे देश का हर बेटी का पिता मेरी तरह ही मर्माहत हो गया। जिसके बाद पुरे बिहार के युवा सड़क पर उतर आये और न्याय की माँग करने लगें। हालांकि, उसके परिवार वालों के द्वारा दुष्कर्म और हत्या की बात की जा रही थी, मगर वह पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नकार दिया गया।

उसके पिता के कुछ छात्रों ने मीडिया को बताया था कि उनलोगों ने मृतक लड़की के शरीर पर खून और स्पर्म देखा था। जबकि उसका शरीर पानी में डूबा हुआ था। किसी भी बलात्कार पीड़िता को मेडिकल से पूर्व नहाने से मना किया जाता है ताकि उसके परीक्षण के समय शरीर पर स्पर्म ट्रेस हो सके। मगर यहाँ पुलिस के द्वारा पोस्टमार्टम में जबरदस्ती, नोंच खसोट की बात से भी इंकार किया गया।

ऐसे निर्भया कांड में बाद सुप्रीम कोर्ट ने रेप की परिभाषा बदल दी है। महिला के शरीर के किसी भी हिस्से में अगर पुरुष अपना प्राइवेट पार्ट डालता है, तो वह भी रेप के दायरे में होगा। इतना ही नहीं महिला के प्राइवेट पार्ट में अगर पुरुष कोई भी ऑब्जेक्ट डालता है, तो वह भी रेप के लिए दोषी होगा। हाँ, ऐसे तो मृतक के परिवार के द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सवाल तो उठाया जाता है मगर दुबारा पोस्टमार्टम की मांग की जगह पता नहीं किसके दबाव में उसकी अंतिम क्रियाकर्म जल्दबाजी में कर दिया जाता है।

अंततः वैशाली एसपी ने हत्या का कारण गलत निगाह से अपहरण और भेद खुलने की डर से हत्या कर शव फेंका जाना बताया है। हैरानी की बात है कि 13 साल की लड़की के साथ 4-5 लोग गलत निगाह से अपहरण करते हैं मगर दुष्कर्म में विफल हो जाते हैं। यही नहीं बल्कि उसके शरीर पर पुलिस पोस्टमार्टम में कोई नोंच-खसोट तक के प्रमाण भी नही मिलते। क्या आपको भी ऐसा लगता है कि इसमें कुछ छुपाया जा रहा है?

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अभी से पहले उसके परिवार वाले लोग लड़की के साथ बलात्कार की बात मजबूती से उठा रहे थे। उसके शरीर पर खून व् स्पर्म मिलने की बात कर रहे थे। पुलिस के रवैया व् लापरवाही का आरोप पर आरोप लगा रहे थे। मगर सोचने वाली बात यह है कि मृतक लड़की का चप्पल, बटन, साइकिल, बैग आदि उनके स्टूडेंट व् ग्रामीणों के द्वारा बरामद किया जाता है। यही नहीं बल्कि मुख्य आरोपी को हिंदुस्तान अखबार के रिपोर्ट के अनुसार उनके ग्रामीणों के द्वारा  छात्रों के द्वारा ही पकड़ा जाता है। आखिर इतना पढ़ें लिखे और लाखों रुपया सैलरी लेने वाले पुलिस अधिकारी नकारा साबित हो गए, क्यों? फिर आखिर अचानक से उस आरोपी की निशानदेही पर पानी भरे तालाब से साइकिल मिलता है। जिसको एनडीआरएफ की टीम खंगाल कर खाली हाथ लौट गई थी।

इस मामले में मुख्य संदिग्ध समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में एक महिला भी शामिल है, जिसपर घटना में साक्ष्य छुपाने का आरोप है। जबकि उसकी लड़की ने एक वीडियों में कबूला है कि साइकिल सड़क के किनारे रखा मिला था। अब सच्चाई क्या है यह जाँच का विषय है। मगर जब उस 8-10  वर्षीय बच्ची ने साइकिल उठाने की बात कबूला तो पुलिस ने उसका जिक्र क्यों नहीं किया?

जितनी मुँह उतनी बातें

अब ऐसे में क्षेत्र के लोग दबी जुबान से पुलिसिया जाँच पर कानाफूसी करने लगे हैं। उनमें तो कई अब खासकर युवा शोसल मिडिया के माध्यम से पुलिस के जाँच पर सीधा सवाल उठा रहे हैं। मगर दूसरी तरफ मृतक के पिता व् उनके स्टूडेंट जो कल तक पुलिस जाँच पर अविश्वास जताते हुए CBI जाँच की मांग कर रहे थे। ये लोग अचानक से खामोश हो गए हैं। क्या ऐसे तो नहीं की उनको किसी के द्वारा डरा दिया गया है?

हालाँकि, पहले ये लोग महनार डीएसपी द्वारा धमकी देने की बात कर रहे थे। जबकि अब उसके पिता के कुछ खास स्टूडेंट्स शोसल मिडिया के माध्यम से CBI जाँच की मांग उठाने वालों को अब कहने लगें हैं कि अपराधी गिरफ्तार हो गया है। उसको फांसी मिलनी चाहिए। अब CBI आकर क्या करेगी? जबकि यह लोग कल तक खुद भी सीबीआई जाँच की मांग कर रह थे। क्या अब किसी को बचाने की कोशिश की जा रहे है या किसी से डर गए हैं?

जरा सोचिए कि पुलिस ने अभी तक यह क्यों नही बताया गया कि आखिर घटना के 4 दिन बाद घटना स्थल पर चिट्ठी, मृतक लड़की का चप्पल, बटन, बिसलेरी का बोतल आदि कौन रखकर गया? तमाम मीडिया रिपोर्ट और पुलिस के बयान को गौर करेंगे तो आरोपियों के निशानदेही पर मृतक लड़की का साइकिल, बैग, हत्या में प्रयुक्त गमछा उनके घर से बरामद कर किया गया। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों के कबूलनामे और निशानदेही पर इन चीजों के मिलने से अपराधी मान लिया गया है।

जबकि पुलिस ने यह नही बताया कि चिट्ठी, मृतक का चप्पल, बटन घटना स्थल पर 4 दिन बाद कौन रखा? उस चिट्ठी में क्या लिखा था? महनार की बेटी का चप्पल 4 दिन बाद जिसने घटना स्थल पर रखा था. उसको पुलिस क्यों बचा रही? अब जिसके पास साइकिल मिला वह हत्यारा और जिसके पास चप्पल और बटन मिला, उसको क्यों छिपाया? क्या वह कोई पावरफुल व्यक्ति है? कल तक जो मिडिया इन चीजों को रहस्मय तरीके से मिलने पर पुलिस के अनुसंधान को गुमराह करने की बात कर रहे थे। जबकि अब यही लोग बिना कोर्ट के फैसला आये ही पुलिस द्वारा पकड़ें गए आरोपियों को मुजरिम साबित कर दिया।

अब लोग सवाल उठाने लगें हैं कि क्या पुलिस ने किसी के दवाब में मामले की लीपा-पोती कर दी है। जबकि अभी तक फोरेंसिक रिपोर्ट भी नहीं आया है और न ही पुलिस ने मृतिका का पोस्टमार्टम रिपोर्ट ही सार्वजनिक किया और न ही मौत का समय ही बताया है। आपको याद होगा कि अभी कुछ दिन पहले ही यूपी पुलिस द्वारा हाथरस कांड में किस तरह का मामला देखने को मिला था।

यही नहीं बल्कि मृतक लड़की के पिता पटोरी में DDG यानी डॉटर डेवलपमेंट ग्रुप चलाते हैं। जिससे उस क्षेत्र में उनका काफी नाम है। उनके बारे में कहा जा रहा कि वो सभी को मुफ्त में पढ़ाते हैं। जिससे उनकी क्षेत्र में काफी चर्चा थी। कहीं ऐसा तो नहीं कि कोई उनके इस प्रसिद्धि से जलता था, जिसके फलस्वरूप बदले की भावना से लड़की की हत्या कर दी। उसके 4 बजे सुबह अकेले सुनसान रास्ता से गुजरने की बात सबको पता रही होगी तो कहीं कोई उसका पीछा तो नहीं किया करता था। अगर करता होगा तो उसने किसी को तो बताया होगा। अभी तक पुलिस ने इस एंगिल से जाँच ही नहीं की और न ही साथ पढ़ने वाले छात्रों-छात्राओं से ही पूछताछ ही की गई है।

ऐसे लड़की की मां ने FIR में लिखा है कि उनकी लड़की रोज सुबह 5 बजे घर से ट्यूशन के लिए जाती थी । जबकि उसके पिता ने एक्सपोज़ बिहार न्यूज के दिए इंटरव्यू में कहा कि चार, सवा चार बजे, फिर कहा कि मुझे ठीक से पता नहीं है। ऐसे एक्सपोज़ बिहार के रिपोर्टर विकास जी ने मृतक लड़की के पिता से कुछ तीखे सवाल पूछ दिए जिससे उनके परिवार के लोग नाराज हो गए। खैर कुछ तो रहस्य है, जिसको पुलिस सुलझाने में कामयाब नहीं हो सकी।

उनके परिवार के लोग नाराज हो गए

Karnauti Vaishali Hatyakand की CBI जाँच की माँग उठायें

आखिर ऐसे क्या हुआ कि अब उसके परिवार के सब लोग चुप हैं, कुछ तो गड़बड़ है। क्या असली दरिंदा अभी भी खुला घुम रहा है? क्या हमारी बेटी को इंसाफ मिल गया या किसी के दबाव में मामले का लीपा-पोती कर दिया गया? ऐसे में हम बिहार सरकार से मांग करते हैं कि बेटी के हत्याकांड की जाँच CBI से करवाई जाए। जब तक बिहार सरकार द्वारा जाँच की घोषणा नहीं की जाती। अगर आप जिन्दा हैं तो आप सभी शोसल मिडिया में हर घंटे एक पोस्ट डालते रहें, अपने आसपास में चर्चा करें और जितना ज्यादा संभव हो सके, शोसल मिडिया, ईमेल, Tweeter, लेटर आदि संवैधानिक तरीके से बिहार सरकार को सीबीआई जाँच के लिए दबाव बनायें, ताकि हमारी बेटियॉं समाज में सुरक्षित रह सकें।

पत्रकार साथियों से विशेष अनुरोध

हमारे पत्रकार साथियों से विशेष अनुरोध है कि अगर आपकी कलम समाज के बुराई के खिलाफ लिखने से डर रही है तो ऐसी कलम तोड़ कर फेंक दें। आप याद करें कि हमारे शहीद भगत सिंह ने कहा था कि “बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती, क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।” मैंने तो ठान लिया कि अब चाहे पुलिस मेरे ऊपर झूठा मुकदमा ही कर जेल में डाल दे या गोली मार दें। मगर समाज और देश की बेटी के इंसाफ के लिए आवाज उठता रहूँगा। मैं भी बेटियों का बाप हूँ। ऐसे कैसे चैन से सो जायूँ जब तक उसका असली कातिल न पकड़ा जाए। #WeWantJustice #WeWantCBI_Investigation

धन्यबाद,
एक बेटी का बाप

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