बिहार मैट्रिक परीक्षार्थियों को जबरदस्ती कोविड टीकाकरण की शिकायत, FIR की मांग

बिहार मैट्रिक परीक्षार्थियों को जबरदस्ती कोविड टीकाकरण – देश में कोविड की तीसरी लहर को मद्देनजर पाबंदियां लगाईं जा रही है। अभी बिहार के छात्र-छात्राओं के लिए मैट्रिक और इंटर की परीक्षा आयोजित होने वाली है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) समस्तीपुर ने एक लिखित आदेश जारी कर मैट्रिक और इंटर की परीक्षार्थियों को कोविड टीकाकरण अनिवार्य रूप से कराने को कहा है। जिसके खिलाफ कल ही अनिरुद्ध कुमार उर्फ़ देवानंद (आरटीआई कार्यकर्त्ता) ने पटोरी थाने में शिकायत कर FIR दर्ज करने की मांग की है। आइये जानते हैं कि पूरा मामला क्या है?

बिहार मैट्रिक परीक्षार्थियों को जबरदस्ती कोविड टीकाकरण

अनिरुद्ध ने बताया कि श्री मदन राय, जिला शिक्षा पदाधिकारी, समस्तीपुर ने ज्ञापांक 103, दिनांक 15 जनवरी 2022 को आदेश जारी कर जिले के 15 वर्ष से 18 वर्ष आयु वर्ग के सभी मैट्रिक एवं इण्टरमीडिएट परीक्षा (10,11,12वीं) के परीक्षार्थियों का परीक्षा के पूर्व अनिवार्य रूप से कोविड 19 टीका आच्छादित कराने को कहा है।

जिसके संबंध में हिंदुस्तान अखबार समस्तीपुर संस्करण में दिनांक 17.01.2021 को खबर भी छपा था। उन्होंने अपने उपरोक्त आदेश के पैरा सं. 3 में लिखा है कि “परीक्षा में सम्मिलित होने वाले परीक्षाथियों को परीक्षा केन्द्र में प्रवेश से पूर्व कोविड-19 टीकाकरण से संबंधित प्रमाण पत्र की माॅंग केन्द्राधीक्षक द्वारा की जा सकती है”।

उन्होंने अपना यह आदेश अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार पटना के आदेश पत्रांक SHSB/GA/4830/20/1/6592 दिनांक 14-01-2022 के आलोक में जारी किया है। जबकि अपर मुख्य सचिव के आदेश में “परीक्षाथियों को परीक्षा केन्द्र में प्रवेश से पूर्व कोविड-19 टीकाकरण से संबंधित प्रमाण पत्र की माॅंग की बात” कहीं भी लिखी नही गई है।

केन्द्र सरकार के अनुसार “कोविड 19 टीका स्वैक्षिक

आगे उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार के अनुसार “कोविड 19 टीका स्वैक्षिक है”। जिसको भारत सरकार स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने RTI जवाब में दिनांक 09.03.2021 में स्वीकार किया है। साथ हीं कहा है कि कोविड-19 टीका का कोई भी संबंध किसी सरकारी सुविधा, राशन, स्कूलों, काॅलेजों, गैस कनेक्शन आदि से नही है।

केंद्र सरकार ने माननीय सुप्रीम कोर्ट को बताया

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केन्द्र सरकार ने माननीय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इवारा फाउंडेशन बनाम भारत संघ और अन्य में हलफ़नामा दायर कर कहा है कि “किसी भी व्यक्ति को इच्छा के विरूद्ध वैक्सीनेशन के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और किसी भी उद्देश्य के लिए वैक्सीन सर्टिफिकेट को अनिवार्य नहीं बनाया गया है”।

परीक्षा केंद्र पर कोविड टीका प्रमाण पत्र की मांग

बिहार में मैट्रिक के परीक्षा में 14 से 15 आयु वर्ग के छात्र-छात्रा भी शामिल होंगे। अब ऐसे में उपरोक्त आदेश और खबर ‘‘परीक्षा केंद्र पर कोविड टीका प्रमाण पत्र की मांग‘‘ की बात से 14 से 15 आयु वर्ग के छात्र-छात्राओं को भी Covid-19 का टीका लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। जबकि केंद्र सरकार के द्वारा अभी 15 से 18 आयु वर्ग के छात्रों के लिए ही कोविड-19 का टीका उपलब्ध करवाया गया है।

जो न केवल केन्द्र सरकार व माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है बल्कि बच्चों के खिलाफ हिंसा भी है। श्री मदन राय व अन्य ने गैर कानूनी आदेश जारी कर व प्रिन्ट मिडिया के मदद से भ्रामक न्यूज फैलाकर न केवल बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य को बल्कि उनके भावात्मक कल्याण और भविष्य को भी खतरे में डाल दिया है।

प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग

श्री अनिरुद्ध कुमार ने पटोरी थानाध्यक्ष को शिकायत भेज कर अविलंब गैर कानूनी आदेश रद्द करवा, दोषियों के खिलाफ केन्द्र सरकार व माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश नही मानने, अपने पद का दुरूपयोग कर जनता की जान को खतरे में डालने वाला आदेश जारी कर दवाब डालने आदि के आरोप के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

उन्होंने अपनी शिकायत माननीय सुप्रीम कोर्ट, माननीय पटना हाईकोर्ट , बिहार के मुख्यमंत्री, माननीय प्रधानमंत्री व् वरीय पदाधिकारियों को भी प्रेषित किया है। उनके द्वारा उठाये इस कदम की क्षेत्र के युवाओं द्वारा शोसल मिडिया में काफी तारीफ की जा रही है।

अभी हाल ही में मेघालय हाईकोर्ट ने भी कहा है कि जबरदस्ती टीकाकरण मौलिक अधिकारों का हनन है। जो कि भारत के संविधान के द्वारा आपको प्रदान किया गया है। ऐसे में जोर-जबरदस्ती के खिलाफ एक डरा हुआ छात्र मरा हुआ समाज का निर्माण करेगा। अगर आप अपने मौलिक अधिकारों की ही रक्षा न कर सकें, तो ऐसे पढ़ाई का क्या फायदा?

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