जन सूचना अधिकारी को जुर्माना
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मध्य रेल डीआरएम ऑफिस पुणे का है। जिसके अपीलार्थी श्री रमेश शर्मा ने भोपाल से पुणे 15.09.2019 को यात्रा ट्रेन नं. 12104 से यात्रा कर रहे थे। उनके कोच के अंदर कोई भी कोच अटेंडेंट मौजूद नहीं था। जब उन्होंने टिकट चेकर (टीसी) से पूछताछ की कि वहां पर कोई अटेंडेंट क्यों नहीं है? ऐसे में उक्त टीसी ने आधिकारिक रूप से आवंटित सभी आठ (8) कोच पर्यवेक्षक को बुलाया।
जब उन्होंने पूछा कि कंपार्टमेंट में कोई अटेंडेंट क्यों नहीं है तो सुपरवाइजर नाम श्री राकेश प्रजापति (आईडी नंबर 1543) ने उन्हें सूचित किया कि केवल आठ कोचों के लिए चार परिचारक आठ आवंटित और शेष चार अनाधिकृत रूप से वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों के आवासों पर तैनात हैं। अपीलकर्ता ने तुरंत कोच अटेंडेंट की अवैध अनुपस्थिति के बारे में एक शिकायत (नंबर 032463) लिखी कि उनकी गैर-मौजूदगी में कैसे एक वरिष्ठ नागरिक को असुविधा का समाना करना पड़ा।
RTI आवेदन लगाकर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी
अपनी इसी शिकायत पर RTI आवेदन लगाकर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। मगर वह चौंक गए जब सीपीआईओ ने यह कहते हुए गलत जवाब दाखिल किया कि सभी आठ आवंटित परिचारक उस दिन ट्रेन में मौजूद थे।

अपीलार्थी ने सीपीआईओ द्वारा गलत जवाब देने और उन्हें गुमराह करने के लिए सजा और अपने लिए मुआवजा की मांग की। उन्हें मानसिक पीड़ा हुई और यात्रियों और विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाने की मांग की। आगे कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करने वाले रेलवे अधिकारियों की दया पर नहीं छोड़ा जाता है। जिसके बाद यह महत्वपूर्ण फैसला दिया गया है।
अपीलार्थी की शिकायत पर जांच के साथ हर्जाना
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Surjeet Shyamal एक श्रमिक जागरूकता लेखक हैं, जो Private Employees को PF, वेतन, ग्रेच्युटी और लेबर कानून से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सरल हिंदी में प्रदान करते हैं। उनका लक्ष्य कर्मचारियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना और सही मार्गदर्शन देना है, ताकि वे सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य जीवन जी सकें। Read More