आत्महत्या कर लूँगा, पटना को मधुबनी पेंटिंग से सजाने वाले कलाकार ने कहा

पटना जंक्शन पर उतारते ही आपको कुछ बदला-बदला सा नजर आयेगा. आपको पुराने दीवारो पर पान-गुटका का पीक और पेशाब की जगह मधुबनी पेंटिंग देखने को मिलेगी. एक बार तो ऐसा लगेगा कि हम पटना की जगह कहीं और तो नहीं पहुंच गए. आजकल ट्रेन भटकने की खबर बहुत जो आ रही, फिर पता चला कि नहीं-नहीं यह तो पटना ही है. पटना अब स्मार्ट सिटी बन चुका हैं. यह कमाल कर दिखाया पटना ऑर्ट कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने. इनलोगों ने दिन-रात मेहनत कर कुछ ही दिनों में पटना को मधुबनी पेंटिंग से सजा कर, काया पलट कर दिया.

मगर यह क्या इस काम को लीड करने वाले कलाकार सत्यप्रकाश ने ‘तेरह लाख के चेक’ को फेसबुक वॉल पर पोस्ट कर लिखा कि “इस पर विचार किया जाय, नही तो मैं आत्महत्या कर लूँगा“. आखिर वह क्या वजह वजह हैं कि एक कलाकार के मन में यह विचार आया?

“पटना को मधुबनी पेंटिंग” क्या मामला है?

बिहार की राजधानी पटना को केंद्र सरकार की योजना स्मार्ट सिटी (Smart City Project) के तहत चयनित कर चमकाने का काम में शुरू हुआ. इसी  प्रोजेक्ट के तहत पटना के दीवारों को मधुबनी पेंटिंग से सजाने का पटना नगर निगम से टेंडर जारी किया. जिसमें सत्यप्रकाश के आर्ट कॉलेज के सीनियर छात्र विशाल मिश्रा की कंपनी को टेंडर मिलता है. सत्य प्रकाश खुद कला एवं शिल्प महाविद्यालय पटना सत्र-2014-2018 (एप्लाइड आर्ट) के छात्र रह चुके है और विगत कई वर्षों से रंगकर्म से जुड़े हैं.

पटना नगर निगम से टेंडर की फोर्मलिटी पूरा होने के बाद विशाल मिश्रा व् उनके सहयोगी रेणुजानंद के निर्देशानुसार काम शुरू किया गया. सत्यप्रकाश जी बताते हैं कि जब हम काम शुरू किए तो शुरुआत में इतना बड़ा काम नही लग रहा था. होता ये था कि, जिस दीवार पर, जितनी दूरी में दीवार पर वाल पुट्टी की रहती थी. बस उसी दीवार पर पेंटिंग करनी थी. धीरे-धीरे दीवार पर पुट्टी होते गया और हम लोग उस दीवार पर पेंटिंग करते गए.

यह काम वे और उनकी टीम जिसमें लगभग 28 से 30 लोग लगातार 40 से 42 दिन तक किये. इस दौरान ये लोग वॉर्ड नवम्बर 57 (मेयर सीता साहू के घर के नजदीक) मीना बाजार से NMCH हॉस्पिटल के गेट तक किया. इस दौरान सभी कलाकारों के नास्ते, खाने व् भाड़े तक का पैसा सत्य प्रकाश को खुद ही देना होता था. फिर एक दिन उनके पास पैसे खत्म हो गये.

जब सत्यप्रकाश ने विशाल को कुछ पैसे की मांग कि तो विशाल मिश्रा ने कहा कि “अभी बिल पास नहीं हुआ”. उसके बाद सत्यप्रकाश के पास पैसे नहीं बचे थे. उन्होंने मज़बूरीवश काम बंद कर दिया. मगर या क्या वादा के मुताबिक 15 दिन बाद जब सत्यप्रकाश पैसे के हिसाब के लिए विशाल मिश्रा से मिले तो वह पहचानने से इंकार कर दिया. यही नहीं बल्कि विशाल मिश्रा अपने सहयोगी रेणुजानंद को भी धोखा देकर फरार हो गया.

पटना नगर निगम कमिश्नर ऑफिस में शिकायत किया

सत्यप्रकाश व् रेणुजानंद ने मिलकर पटना नगर निगम कमिश्नर ऑफिस में शिकायत किया. जिसके बाद कमिश्नर साहब के कहने पर विशाल मिश्रा ने सत्यप्रकाश के टीम को 16 लाख पचास हजार की जगह कमीशन काट कर 13 लाख रु का चेक दिया. जबकि रेणुजानंद को लगभग 8 लाख की जगह 3 लाख 50 हज़ार का चेक दिया.

Patna Madhubani painting Cheque
Patna Madhubani painting

पटना नगर निगम कमिश्नर ऑफिस के भरोसा दिलाने पर कम्प्लेन वापस ले लिया गया. मगर यह क्या जब उक्त चेक को बैंक में लेकर पहुँचें तो “स्टॉप चेक” बताया गया. जब इसके बारे में पूछने के लिए चेक जारीकर्ता विशाल मिश्रा को कॉल किया तो वह गली-गलौज कर बोला “पैसा नहीं दूँगा”.

आरेस्ट वारंट जारी होना ही था कि लॉकडाउन हो गया

सत्यप्रकाश उस चेक को लेकर बहादुरपुर थाने में गए. जहाँ उनको बताया गया कि चेक का केस कोर्ट में लगेगा. जिसके बाद वकील की मदद से कोर्ट में केस फाईल करते हैं. जिसमें कोर्ट के समन के वावजूद विशाल मिश्रा उपस्थित नहीं होता है. उसके नाम आरेस्ट वारंट जारी होना ही था कि लॉकडाउन हो जाता है.

अब चूँकि सत्यप्रकाश ने अपने साथी कलाकारों के साथ मिलकर पटना को स्मार्ट बनाने का बीड़ा उठाया था. इसलिए उसके साथी पैसे के लिए उनके पास ही आते हैं. वो अपने पॉकेट से जरुरत अनुसार अपने साथ काम किए कलाकारो को पैसा देते गए. मगर लॉकडाउन ने सभी का रोजी-रोजगार छीन लिया है. अब इस स्थिति में उनलोगों को भूखे मरने की नौबत आ गई है. वो लोग हर प्रशासनिक अधिकारी से गुहार लगाकर थक चुके हैं. सत्यप्रकाश ने दुखी मन से कहा “मेरी कहीं सुनवाई नही हो रही हैं. इसलिए आत्महत्या की बात लिखी“.

उन्होंने बताया कि हमें पहले पता होता कि मेरे साथ धोखा होगा तो यह काम ही नहीं करता. सत्यप्रकाश सैदपुर के स्लम एरिया में रहते हैं और स्लम के बच्चों को लेकर लगातार नाटक करते रहते हैं. अभी हाल ही में उनकी काफी चर्चा हुई थी. जब तक्षशीला एजुकेशन सोसाइटी के तरफ से मिली 20 हजार रूपये की आर्थिक मदद को अपने साथ काम करने वाले स्लम बच्चों में बांट दिया था.

देश-विदेश में मधुबनी पेंटिंग का क्रेज

मधुबनी पेंटिंग के कारण बिहार का देश विदेश में नाम हो रहा है. आखिर पटना भी इन कलाकारों के कला और मेहनत से स्मार्ट बन गया. मगर अपने ही शहर में शाहजहां की ही तरह नीतीश सरकार के अधिकारियों के उदासीनता के कारण इन कलाकारों  को धोखा मिला. भले ही मामला कोर्ट में हो मगर इन युवा कलाकारों को बिहार सरकार से अभी भी उम्मीद हैं कि उनके साथ न्याय किया जायेगा. केंद्र और बिहार सरकार को भी इन कलाकारों की सुध लेनी चाहिए नहीं तो उनको देश कभी माफ़ नहीं करेगा.

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6 thoughts on “आत्महत्या कर लूँगा, पटना को मधुबनी पेंटिंग से सजाने वाले कलाकार ने कहा”

  1. hello sir, mai Delhi mein center government k department mein outsourced D.E.O hu meri salary 17033 in hand mil rhi h ..kya ye thik h ..jbki 19,572 milni Chahiye ..

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    • ऐसे कैसे बता सकता कि ठीक हैं कि नहीं. आप नोटिफिकेशन में अपने कैटेगरी के अनुसार चेक कीजिये

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  2. sir 19,572 ki category m hu Graduate hu .. kya ESI or EPF deduct hoke 17033 mil rhi h..
    ya fir 19,572 inhand salary milni Chahiye ..

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    • हाँ, इसमें से आपका ESIC & पीएफ का हिस्सा कटेगा

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  3. thank you sir..
    or sir hmare office m Bonus dene k liye mana kr rhe h .. adhikari bolte h ki Zonal account office reject kr dega bill hmare bonus ka ..last year bhi nahi mila tha bonus hme.. Zonal account officer kehta h kisi dusre office ka bonus ka order dikhao jisme unhe mila ho bonus .. tabhi milega nhi to is bar bhi nahi mil payega bonus…

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    • आप बोनस एक्ट के अंडर आते हैं या नहीं उसके लिए पहले हमारे इस पोस्ट को पढ़ें। इसमें आपको शिकायत कहाँ करना हैं इसकी पूरी जानकारी दी गई हैं. उसके बाद जो भी सवाल हो सम्बंधित पोस्ट के कमेंट में लिखा करे ताकि अधिक लोगों को इसका बेनिफिट मिल सके – READ MORE CLICK HERE Payment of Bonus Act

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