अगर ठेकेदार पैसा ना दे तो क्या करें | Agar Thekedar Paisa na de to kya kare?

आज पुरे देश में ठेका पर कर्मचारी रखा जाने लगा है। जिसके बाद ठेका कर्मचारी (Contract Employess) को नौकरी से निकाल देने का डर दिखाकर शोषण किया जाता है। ऐसे में आपमें से बहुत से आउटसोर्स कर्मचारी व् ठेका कर्मचारी का सवाल होता है कि ठेकेदार पैसा ना दे तो क्या करें | Thekedar Paisa na de to kya kare? आज हम आपके इसी सवाल का जवाब बहुत ही साधारण तरीके से देने जा रहे हैं। जिससे आप बिना किसी के सहायता के अपना पैसा ठेकेदार से आसानी से पा सकें।

Thekedar Paisa na de to kya kare

अगर आप किसी भी कंपनी या संस्थान में ठेकेदार के मार्फत/मैनपावर एजेंसी के द्वारा काम कर रहे हैं तो ऐसे में आपके लिए भी कुछ अधिकार प्रदान किये गए हैं। अब वह कम्पनी या संस्थान सरकारी हो या प्राइवेट आपके लिए समान कानून है। अगर आप किसी प्राइवेट कंपनी/दुकान में काम करते हैं और आपको आपका मालिक सैलरी नहीं तो आपको अलग प्रकिया का पालन करना होगा। अब ऐसी में यदि ठेकदार आपको पैसा नहीं दे तो क्या करेंगे? आज हम आपको इसके बारे में आपके क़ानूनी अधिकार की जानकारी देने जा रहे हैं। जिससे आप बिना किसी की सहायता लिए आसानी से अपना बकाया पैसा (contract labour salary) पा सकेंगे।

Thekedar vetan na de to kya kare?

आज सरकारी से लेकर प्राइवेट कंपनियों/संस्थानों द्वारा धरल्ले से कॉन्ट्रैक्ट पर कर्मचारी रखे जाते हैं। ऐसा वो इसलिए करते ताकि कर्मचारियों का जम कर शोषण कर सकें। अगर वो विरोध करें तो उनको आसानी से नौकरी से निकाला जा सके। अब ऐसा नहीं है कि कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए कानून नहीं है। बिलकुल है, मगर शिकायत मिलने पर ठेकेदार और मुख्य नियोक्ता (Principal Employer) एक दूसरे का दोष देकर बचने का प्रयास करते हैं।

ठेकेदार पैसा नहीं दे रहा है क्या करें | thekedar paisa na de to kya kare

अगर आप किसी ऐसे कंपनी या संस्थान में ठेकेदार के माध्यम से काम कर रहे हैं, जिसमें 20 या उससे अधिक कर्मचारी 12 महीनों में अनुबंध पर 1 दिन के लिए कार्यरत हैं तो ऐसे में वो Contract Labour (Regulation & Abolition) Act 1970 के दायरे में आएंगे। पहले आपके मुख्य नियोक्ता को खुद ही श्रम विभाग में रजिस्टर्ड होना होता है। जिसके बाद उनके ठेकेदार को भी लाइसेंस लेना पड़ता है। जिसके तहत दोनों को कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट का पालन सुनिश्चित करना होता है।

अगर ठेकेदार आपका पैसा नहीं दे रहा है?

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अब ऐसे में आप किसी कम्पनी या संस्थान में ठेकेदार के मार्फत काम कर रहे हैं तो आपमें से बहुत से कर्मचारियों ने निम्न सवाल पूछा है-

  • अगर ठेकेदार आपका पैसा नहीं दे रहा है?
  • अगर कोई मजदूर की मजदूरी नहीं दे क्या करना चाहिये?
  • ठेकेदार समय से सैलरी का भुगतान नहीं कर रहा?
  • ठेकेदार ने वेतन में कटौती कर लिया है?
  • ठेकेदार के वेतन का भुगतान न करने के खिलाफ कानूनी कार्रवाई?
  • यदि आपका मालिक आपके काम का सही वेतन न देता तो?

ठेका वर्कर के सैलरी की जिम्मेदारी

अब अगर ऐसे में आपके ठेकेदार आपका सैलरी न दो तो आपके सैलरी की जिम्मेदारी ठेकेदार की होती है।अगर आप रोज के अनुसार काम करते हैं तो आपका पैसा काम खत्म होते ही और यदि मासिक के अनुसार नौकरी करते हैं तो ठेकेदार को आपकी सैलरी अगले महीने की 7 से 10 तारीख के अंदर दे देना है। अगर कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट के प्रधान के तहत ठेकेदार पैसा/सैलरी नहीं दे रहा तो मुख्य नियोक्ता की जिम्मेदारी है कि वो डायरेक्टली कॉन्ट्रैक्ट वर्कर का पेमेंट कर ठेकेदार के पैसे से कटौती कर ले। जिसकी जानकारी हमने अपने पूर्व के पोस्ट में दी है, जिसको आप विस्तार से पढ़ सकते हैं।

अब जैसे ही आपका ठेकेदार काम समाप्ति के उपरांत पैसा का भुगतान नहीं कर तो आपको अपने मुख्य नियोक्ता (Principal Employer) को लिखित शिकायत देना है। जिसमें आप अपने ठेकेदार का पूरा नाम, पता, काम का स्थान के साथ अपना पूरा नाम, पता, फोन नंबर, एम्प्लोयी आईडी, बकाया राशि आदि का उल्लेख करना है। आप अपने शिकायत में यह जरूर लिखें कि आपने कब से कब तक किस स्थान/प्रोजेक्ट के लिए काम किया है। अगर हो सके तो आप अपना ठेकदार द्वारा दिया आईकार्ड आदि का फोटोकॉपी हो तो लगा दें।

Thekedar salary nahi de to kya karna chahie

आपके मुख्य नियोक्ता के पास शिकायत के 7 से 15 दिन के अंदर आपके पैसे का भुगतान नहीं किया जाए। ऐसे में आप अपने एरिया के सम्बन्धित लेबर कमिश्नर ऑफिस में लिखित शिकायत करेंगे। जिसके बाद लेबर कमिश्नर ही क़ानूनी कार्रवाई कर आपके पैसे का भुगतान करवा सकते हैं। आपको लेबर कमिश्नर ऑफिस में शिकायत करते समय ध्यान रखने वाली मुख्य बातें-

  1. आपको अपने सम्बन्धित सरकार (राज्य सरकार/केंद्र सरकार) के लेबर कमिश्नर ऑफिस में ही शिकायत करना है।
  2. अगर आप राज्य सरकार के किसी विभाग, किसी प्राइवेट कम्पनी के अंतर्गत हैं तो राज्य सरकार के लेबर कमिश्रर ऑफिस में शिकायत करें।
  3. अगर आप रेलवे, पोस्ट ऑफिस, आईआरसीटीसी, एयरपोर्ट, सीबीएससी, एसएफआई, कोल, आदि में कार्यरत हैं तो केंद्र सरकार के रीजिनल लेबर कमिश्रर ऑफिस में शिकायत करेंगे।
  4. अपने शिकायत में मुख्य नियोक्ता को पार्टी नंबर 1 बनाए और उनको भेजे शिकायत पत्र का जिक्र करते हुए फोटो कॉपी संलग्न करें।
  5. अगर आपको लेबर कमिश्रर ऑफिस द्वारा प्राप्ति नहीं दिया जाए तो आपने शिकायत का कॉपी रजिस्टर्ड पोस्ट/स्पीड पोस्ट से जरूर भेजें।

आप जैसे ही लेबर कमिश्नर ऑफिस में लिखित शिकायत करेंगे। उसके कुछ ही दिन बाद 30 दिनों के अंदर आपको और आपके ठेकेदार और मुख्य नियोक्ता को नोटिस देकर बुलाया जायेगा। जिसके बाद आपके शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आपका पैसा दिलवाया जायेगा। जिसके लिए आपसे कोई भी फ़ीस नहीं लिया जायेगा। अगर आपको हमारी जानकारी अच्छी लगे तो अपने साथियों के साथ शेयर जरूर करें।

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