Job Termination Right of Employee – किसी भी कर्मचारी के लिए नौकरी छीन जाना काफी पीड़ादायक है। कंपनी के द्वारा कई बार बिना किसी पूर्व सूचना के बिना कोई कारण बताये नौकरी से निकाल दिया जाता है। जिससे उनको काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे विषम परिस्थितियों में कर्मचारियों को उनके क़ानूनी अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरुरी है। हम अपने इस पोस्ट में आपको नौकरी से निकाले जाने पर कर्मचारी के अधिकार की जानकारी देने जा रहे हैं।
Job Termination Right of Employee in Hindi
भारतीय श्रम कानून कर्मचारियों को विभिन्न प्रकार से सुरक्षा प्रदान करती है ताकि कंपनी के द्वारा उनके साथ मनमर्जी नहीं किया जा सके। नौकरी से निकाले जाने पर कर्मचारी के अधिकार (Job Termination Right of Employee) निम्न प्रकार से है-
नोटिस पीरियड का अधिकार
अधिकांश रोजगार अनुबंधों और श्रम कानूनों के तहत किसी भी कर्मचारी की सेवाएं समाप्त करने से पहले उसे निर्धारित नोटिस पीरियड देना अनिवार्य होता है। सामान्य तौर पर यह अवधि 1 से 3 महीने तक की होती है। यदि कंपनी बिना नोटिस के तुरंत नौकरी समाप्त करती है, तो उसे कर्मचारी को नोटिस अवधि के बराबर वेतन का भुगतान करना होता है, जिसे Salary in lieu of notice कहा जाता है। जो कि हर कर्मचारियों का अधिकार है, जो उसको नौकरी से निकाले जाने के समय मिलना चाहिए।
नौकरी से निकालने का कारण बताना जरुरी
किसी भी कर्मचारी को बिना कारण बताये नौकरी से नहीं निकाला जा सकता है। कर्मचारी को कंपनी के द्वारा नौकरी से निकालते समय टर्मिनेशन लेटर देना होगा। जिसमें नौकरी से निकालने का कारण साफ़ से लिखा होना चाहिए। कर्मचारी के द्वारा अनुशासनहीनता, खराब प्रदर्शन, धोखाधड़ी या कंपनी की पॉलिसी उल्लंघन जैसे कारण ही वैध माने जाते हैं।
फुल एंड फाइनल सेटलमेंट नियम
कर्मचारी को नौकरी से निकालते समय उसके पूरा बकाया पैसे का भुगतान मिलना चाहिए। जिसमें नोटिस पीरियड का भुगतान (अगर लागू हो), ग्रेच्युटी (Gratuity) का भुगतान अगर पहले के लिए के अनुसार 5 साल की सेवा पूरी कर ली हो। पीएफ के पैसे का भुगतान, बोनस का भुगतान और कर्मचारी के बचे हुए छुट्टियों का नगद भुगतान करना आवश्यक है।
सुनवाई का मौका
अगर कंपनी के द्वारा कर्मचारी के ऊपर किसी भी गंभीर आरोप (जैसे धोखाधड़ी, ग़लत आचरण) के आधार पर कर्मचारी को हटाया जा रहा है। ऐसे में उस कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए। बिना किसी सुनवाई और मौका दिया नौकरी से निकालने को अवैध निष्कासन माना जा सकता है। Job Termination Right of Employee की जानकारी रहने पर आप अपनी लड़ाई लड़ सकते हैं।
अन्य क़ानूनी सुरक्षा का अधिकार
यदि कोई कर्मचारी औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत वर्कमैन की श्रेणी में आता है और उसने 240 दिनों से अधिक सेवा पूरी कर ली है, तो उसे बिना वैध कारण हटाना गैरकानूनी माना जाता है। ऐसे मामलों में कर्मचारी लेबर कोर्ट का सहारा ले सकता है। मातृत्व लाभ कानून के अनुसार गर्भवती महिला कर्मचारी को गर्भावस्था के दौरान नौकरी से हटाया नहीं जा सकता। किसी कर्मचारी को जाति, धर्म, लिंग या दिव्यांगता के आधार पर नौकरी से निकालना कानूनन अपराध है।
न्याय पाने का अधिकार
यदि किसी कर्मचारी को यह महसूस होता है कि उसके साथ गलत व्यवहार या अन्याय हुआ है, तो उसके पास कई कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं। वह पहले कंपनी के HR विभाग या ग्रिवांस रिड्रेसल सिस्टम में शिकायत दर्ज कर सकता है। इसके अलावा लेबर कमिश्नर के समक्ष आवेदन दिया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर लेबर कोर्ट या इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल में मामला दायर करने का भी अधिकार है।
यह समझना ज़रूरी है कि किसी कर्मचारी की सेवाएं समाप्त करना केवल नियोक्ता की मनमानी नहीं हो सकती। यह प्रक्रिया कानून के अनुसार, उचित कारणों और तय नोटिस पीरियड के साथ ही पूरी की जानी चाहिए। हर कर्मचारी को अपने नोटिस पीरियड, मुआवज़े और न्याय पाने के अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए। इसलिए यदि आपको अचानक नौकरी से हटाया जाता है, तो घबराने के बजाय अपने रोज़गार अनुबंध और श्रम कानूनों को देखें और ज़रूरत हो तो कानूनी सलाह अवश्य लें।
Job Termination Right of Employee कर्मचारी के क़ानूनी अधिकार
जिसके बाद आप लेबर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। जिसके बारे में बहुत सारी जानकारी हमारे इस ब्लॉग पर उपलब्ध है।
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