• Breaking News

    About Me

    Hello Friends,
    मैं SurjeetShyamal, www.workervoice.in के लिए Blogging कर रहा हूँ. मै न तो कोई लेखक हूँ और न ही पत्रकार, मगर परिस्थिति कुछ ऐसी बनी की साथियों तक अपनी बात पहुँचने के लिए पहले Facebook फिर बाद में Blog Writing शुरू किया. अपने बारे में लिखना सबसे Default काम है. ऐसे नहीं की मै बहुत अच्छा और सब कुछ ठीक लिखता हूँ मगर मेरी कोशिश यह रहती है की आप सभी Friends तक सही Information पहुंचे.

    Worker हमारे समाज का वह तबका है जिस पर पूरे Country आर्थिक उन्नति टिकी होती है. वह मानवीय श्रम का सबसे आदर्श उदाहरण है. वह सभी प्रकार के क्रियाकलापों की धुरी है. आज के मशीनी युग में भी उसकी महत्ता कम नहीं हुई है. Worker अपना श्रम बेचता है, बदले में वह Minimum Wages प्राप्त करता है. उसका जीवन-यापन दैनिक मजदूरी के आधार पर होता है.
    .
    आज हर People मजदूर/वर्कर है जो काम के बदले पैसे कमाता है और उनको कभी न कभी किसी न किसी तरह शोषण का शिकार होना ही पड़ता है. ज्यादातर लोग इस शोषण को भी अपनी Duty का Part समझ कर काम करते रहते है. मगर कुछ लोग इसके Against Straggle करते है. मेरी भी कुछ ऐसी ही Story है.

    मेरी कहानी (My Story: Surjeet Shyamal)
    जब IRCTC (Indian Railway Catering & Tourism Corporation Limited) में Contract Workersके लिए 1970 के कानून के अनुसार "Equal Pay for Equal Work (समान काम का सामान वेतन) की Demand की तो "Unsatisfactory Performance” कहकर 17.10.2013 को Job से Terminate किया गया. जबकि मुझे Best Service के लिए CMD, IRCTC ने उसी वर्ष का Best Employee Award प्रदान किया था. इसके बाद हार न मानी और पुरे Country के Contract Workers के लिए " Equal Pay for Equal Work" लागू करवाने के लिए Delhi High Court में PIL (जनहित याचिका संख्या W.P.(C.) 2175/2014) दायर किया.
      
    इसके उपरांत कई तरह की Problems आयी. उस जनहित याचिका (PIL) को वापस लेने क़े लिए जान से मारने की धमकी से लेकर पुरे Family को Government क़े इशारे पर प्रताड़ित किया जाने लगा. मगर सब कुछ सहते हुए भी अपने वसूलों से समझौता नहीं किया. कुछ लोगों का साथ मिला तो कुछ लोगों से सबक भी मिला. खैर इसके बाद भी उसने दुबारा से Workers को संगठित करना शुरू किया और CITU के मदद से IRCTC के उपेक्षित व् हकों से वंचित Workers को उनका हक दिलाने के लिए Straggle की शुरुआत की. धीरे-धीरे वर्करों के अधिकार के साथ ही साथ Labour Laws की Information देना शुरू की. Workers से कनेक्ट होने  के लिए Social Media और यह Blog ही एकमात्र माध्यम था . दिन-रात लगाकर खुद भी Workers हकों की जानकारी ली और साथ ही उसको पल-पल Workers तक पहुंचाने में कोई कसर न छोड़ी. 2017 में PIL का Order आ चूका है. इसका फायदा लगभग देश के 20 लाख + Contract Workers को मिला है.

    ठेका वर्कर के लिए जनहित याचिका में मिली जीत, मगर लड़ाई अभी जारी है.

    जिसके बाद कोर्ट ने ठेकाकर्मियों के मांग को जायज बताया और ड्युप्टी लेबर कमिश्नर सेन्ट्रल को 3 महीने के अंदर आईआरसीसीटी के वर्करों के अप्लीकेशन फाइल करने पर मामले की जांच कर लागू करने का निर्देश जारी किया. माननीय कोर्ट ने इस याचिका में किये गए मांग "पुरे देश के ठेका वर्कर के लिए समान काम का समान वेतन लागु" करने के लिए भारत सरकार को निर्देश नहीं दिया. मगर न्यूनतम वेतन के लिए केंद्र सरकार को फटकार लगाई कि "ठेका वर्कर का न्यूनतम वेतन उस विभाग में कार्यरत रेगुलर वर्कर के न्यूनतम वेतन के आसपास होना चाहिए.  

    मेरे जनहित याचिका का फैसला (दिनांक 11 मई 2017) के ठीक 15 दिनों के बाद (दिनांक 28 मई 2017) ही भारत सरकार ने सेंट्रल गवर्नमेंट के अंतर्गत काम करने वाले पुरे देश के ठेका वर्कर के लिए न्यूनतम वेतन को 9,000/- प्रति माह से बढ़ाकर अकुशल कर्मियों का न्यूनतम वेतन 13,936 /- अर्ध-कुशल कर्मियों के 15,418/- कुशल कर्मचारियों के लिये 16,978/- अत्यधिक कुशल यानि स्नातक 18460 किया गया. उक्त अधिसूचना के आधार पर सभी वर्करों के लिए 20 अप्रैल 2017 से बेनिफिट दिया गया है. 2013 के सरकारी आंकड़े के मुताबिक इसका बेनिफिट लगभग देश के 20 लाख+ ठेका वर्कर को मिला है. जिसके बाद लिए अभी भी लड़ाई जारी है. (अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें).

    मैंने ब्लॉग WorkerVoice.in क्यों बनाया ?

    हमने पाया की इतना बड़ा मुद्दा होने कई बाद भी मिडिया में खबर तो उठाया जा रहा है और अगर कोई पत्रकार भाई हमारे आवाज को उठना चाहता तो उसके पास बड़े अधिकारी का फोन चला जाता और हमारी आवाज दब जाती. ऐसी परिस्थिति में इस ब्लॉग ने हमारे साथियों कई लिए काफी उपयोगी साबित हुई.

    मजदूरों/वर्करों की मदद के लिए एक दूसरे से जुड़ने, एक दूसरे से जानकारी शेयर करने के लिए इंटरनेट एक उपयोगी माध्यम है. मगर बहुत काम जानकारी ही हिंदी में उपलब्ध हो पाती है. इस ब्लॉग का उद्देश्य मजदूरों/वर्करों से जुड़े मुद्दे और समस्या ही नहीं बल्कि आम जिंदगी में आने वाले हर उस मुद्दे और उससे सम्बंधित जानकारी हिंदी में उपलब्ध करना ही नहीं बल्कि उनकी हर संभव सहायता करना है. इसके साथ ही देश के युवाओं के लिए कोढ़ बन चुके ठेका सिस्टम को जड़ से खत्म करने की पुरे देश के ठेका वर्कर को संगठित करना.


    Blogging के जरिये हमारा उद्देश्य और लक्ष्य:


    हम सभी को पता है कि देश के युवाओं के लिए  "ठेका सिस्टम" एक कोढ़ का रूप ले चूका है. अगर समय रहते इसको जड़ से समाप्त नहीं किया गया तो हमारी आने वाली नस्लों को तबाह कर देगी. इस सिस्टम को जड़ से उखाड़ फेंकना केवल एक या सौ लोगों के बस की बात नहीं है. मगर यदि इसी दिशा में निरंतर प्रयास किया जाए तो एक से सौ, सौ से हजार, हजार से लाख बनने में देर नहीं लगता है. हम अपने इस ब्लॉग का उद्देश्य वर्कर/कर्मचारियों व् आमजन से जुड़े हर मुद्दे को सीधा और सरल भाषा में उनतक पहुंचना और इसके साथ ही "ठेका सिस्टम" को जड़ से उखाड़ फेकने के लिए पुरे देश के ठेका वर्कर जागरूक कर संगठित करने की कोशिश मात्र है.

    Contract Workers के प्रदर्शन श्रम मंत्रालय, श्रमशक्ति भवन, नई दिल्ली (22.12.2016) को संबोधित किया.



    हमसे कैसे जुड़े?

    अगर आपको हमारे किसी भी पोस्ट से सम्बंधित कुछ भी पूछना हो या अतिरिक्त जानकारी देनी हो तो उसी पोस्ट के अंत में कमेंट बॉक्स में लिखकर पूछ सकते हैं. हम तुरंत ही आपसे संपर्क करेंगे. इसके आलावा आप किसी भी सरकारी या प्राइवेट विभाग में कार्यरत हो और किसी भी तरह की मदद की जरूरत हो तो बेचिक कमेंट बॉक्स में लिखकर बता सकते हैं.

    हमें बताने में ख़ुशी हो रही है कि आज आपलोगों के बदौलत हमारे फेसबुक पेज पर सवा लाख से भी जयादा लोग जुड़ चुके हैं. आप भी यहां क्लिक कर जुड़ सकते हैं.

    हमारे संघर्ष के द्वारा अभी तक की उपलब्धि: 

    • आरआरसीटीसी में आउटसोर्स वर्करों के लिए न्यूनतम वेतन लागू करवाया.
    • आरआरसीटीसी में आउटसोर्स महिलाओं के लिए मेटरनिटी अवकाश लागू करवाया.
    • "समान काम का समान वेतन" के लिए 2013 से शोसल मिडिया में कम्पैनिंग कर पुरे देश के वर्करों तक एक-एक जानकारी पहुंचने का प्रयास.
    • आरआरसीटीसी, नई दिल्ली, कलकत्ता कर्मचारी यूनियन का गठन.
    • आईआरसीटीसी को आरटीआई द्वारा दबाब बनाकर ठेका कानून एक्ट के तहत रजिस्टर्ड करवाया.
    • आरआरसीटीसी में "समान काम का समान" वेतन लागु करवाने का सर्कुलर जारी (सैलरी 25-50 हजार).
    • आईआरसीटीसी में ऑफिस रैंक E1-4 के अधिकारीयों को वायोमैट्रिक्सAttendance अनिवार्य करवाना.
    • आरआरसीटीसी कॉर्पोरेट ऑफिस में महिला वर्करों के लिए विशाखा गाइडलाइन के तहत ICC (आईसीसी) Internal Complaint Committee का गठन.
    • CBSE को RTI द्वारा दबाब बनाकर ठेका कानून के तहत रजिस्टर्ड करवाया.
    • दिल्ली में खुद पहल कर 19+ विभागों के ठेका कर्मचारियोँ को संगठित कर "Joint Action Committee Against Contract System का गठन व Labour Minister Delhi व् CM Office, Delhi पर जोरदार प्रदर्शन किया. जिसके फलस्वरूप केजरीवाल सरकार द्वारा 39% वृद्धि के साथ नया न्यूनतम वेतन का नोटिफिकेशन जारी किया गया. 
    • दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका के द्वारा पुरे देश के सेंट्रल गवर्नमंट के अंतर्गत काम करने वाले 20 लाख+ ठेका वर्करों का वेतन न्यूनतम वेतन को 9,000/- प्रति माह से बढ़ाकर 14,000/- स्नातक पास ठेका वर्कर का 18,460 करवाया.
    • पुरे देश में "समान काम के लिए समान वेतन" लागू करवाने के लिए लड़ाई अभी भी जारी है.

    और आगे भी जारी रहेगा. हम जीतने क़े लिए लड़ रहे हैं और आज कल जीत हमारी ही होगी. आप भी हमें निःसंकोच अपनी समस्या या सुझाव भेज सकते है. यह ब्लॉग गरीब मजदूरों की आवाज उठाने की एक छोटी सी कोशिश मात्र है..आते रहियेगा.












    Contact Me:
    City: New Delhi - 91
    Email: surjeetshyamal@gmail.com

    Disclaimer: वर्कर वॉयस ब्लॉग के कंटेंट्स व् फोटो विभिन्न स्थानों के साथियों के द्वारा भेजे गए जानकारी, इस परिवेश के अनुभव, प्रिंट मीडया, इंटरनेट पर उपलब्ध लेखा या खबर की सहायता से ली जाती है. अगर कहीं त्रुटि रह गया हो, कुछ आपत्तिजनक लगे, कॉपीराइट का उललंघन हो तो कृपया हमने हमारे ईमेल पर लिखित में तुरंत सूचित करें, ताकि उस तथ्यों के संशोधन हेतु पुनर्विचार किया जा सके. वर्कर वॉयस के प्रत्येक लेख आपके नीचे 'कमेंट बॉक्स' में आपके द्वारा दी गयी 'प्रतिक्रिया' लेखों की क्वालिटी और बेहतर बनायेगी, ऐसा हमारा मानना है. उम्मीद है हर लेख पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे.

    22 comments:

    1. आपके कार्य बहुत हो सराहनीय हैं।
      आप अपने स्तर से ठेका प्रथा को खत्म करने हेतु जो कार्य कर रहे हैं वह आने वाले समय के लिए एक नज़ीर पेश करेगा।
      धन्यवाद

      ReplyDelete
      Replies
      1. जी धन्यबाद संजीव भाई. यह ठेका प्रथा एक तरह की गुलामी है. जिसके खिलाफ लड़ना और मिटाना किसी एक के बस में नहीं. हां, मगर अब लोगों को तय करना है कि वो क्या चाहते है कि कल लोग उनको लड़ने वालों में याद करें या तमाशा देखने वालों में.

        Delete
    2. सचमुच सर, आपके इस काम की जितनी भी तारीफ की जाए काम है. मैं पोस्ट ऑफिस डिपार्टमेंट में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करती हूँ. अपने दोस्तों को आपके संघर्ष और ब्लॉग के बारे में बताउंगी.

      ReplyDelete
      Replies
      1. जी धन्यबाद, यह तो आपका बड़प्पन है. जी जरूर बताएं.

        Delete
    3. सुरजीत जी आपका संघर्ष सरहनीय है। 2013 से आप ठेका वर्कर्स के लिए संघर्षरत है ओर इस ब्लॉग के द्वारा भी वर्कर्स कम्युनिटी को उनके हको के बारे में जागरूक कर रहे है, जिसके लिए आपका धन्यवाद देता हूं और कहना चाहता हु आपके संघर्ष (हमारे) में कही न कही भागीदार रहा हु ओर इस भागीदारी के कारण ही वर्किंग क्लास के हितों के बारे में जान पाया हूं और उनके हितों का सम्मान करता हु। आगे भी आप कुछ न कुछ हमसे शेयर करते रहिएगया ताकि हम और जान और समझ पाए।

      ReplyDelete
      Replies
      1. 1200 % राइट हरीश भाई, सचमुच आपलोग नहीं होते तो शायद इतना कुछ कर पाना आसान ही नहीं था. ऊपर ही मैंने (हमारे संघर्ष के द्वारा अभी तक की उपलब्धि) इसलिए तो लिखा है. इसमें केवल मैं या हरीश ही नहीं बल्कि और भी बहुत से लोग है. असली लड़ाई तो अब शुरू हुई है. जब लोगों की उम्मीद हमसे पहले से अधिक बढ़ गई है. इस लड़ाई को मुकाम तक ले जाना है.

        Delete
    4. मैं विक्की कुमार बोकारो स्टील सिटी का निवासी हु बिकारो जनरैल अस्पताल में कार्यरत हु झारखण्ड में अभी 281 रुपया न्यूनतम मजदूरी है अकुशल कामगार का आज के तारिक में 2018 में 18 अप्रैल को दैनिक जागरण में एक न्यूज़ आया था कि 1 अप्रैल से 524 रुपया न्यूनतम मज़दूरी हो गई है लेकिन यहाँ पे उस न्यूज़ को गलत बताया जा रहा है ये लड़ाई मैं भी लड़ना चाहता हु मुझे आपसे जुड़ने के लिए क्या करना हॉग

      ReplyDelete
      Replies
      1. विक्की जी, बिल्कुल सही न्यूज है. जिसका जिक्र पहले भी अपने ब्लॉग में कर चुका हूं. मेरे जनहित याचिका के फैसले के मात्र 14 दिन बाद ही सेंटल गवर्मेंट के पूरे देश के सभी विभागों के लिए मई 2017 से ही न्यूनतम वेतन लगभग 40% से ज्यादा की बढ़ोतरी की गई है. जिसके बाद अभी अप्रैल 2018 में मंहगाई भत्ता में वृद्धि कर हरेक कर्मचारियों को कम से कम 534 रुपया प्रतिदिन के दर से मिलना चाहिए. इस ब्लॉग के नीचे सब्सक्रिप्शन बॉक्स में अपना ईमेल आईडी submit करें और जुड़े रहे. हमारे सभी पोस्ट को पढ़े और अपने साथियों को भी बताएं.

        Delete
    5. Shyamal jee, Aapke blog ke every post ko padhta hun. esse kafi prerna milti hai. Aise hi new information share kiya karen. Thank You

      ReplyDelete
      Replies
      1. रोहित जी, आपके फीडबैक के लिए बहुत-बहुत धन्यबाद. आपलोगों के कमेंट से हमें ऊर्जा मिलती है. उम्मीद करूंगा कि अपने साथियों को भी हमारे ब्लॉग के बारे में बतायेंगे.

        Delete
    6. Very Helpful..... I was not able to understand what to do about my sudden termination.....but because of you sir I knw what to do now. Also u helped me on messenger and also on instant call. You guide me very well. Its awsm. Thank you so much sir.

      ReplyDelete
      Replies
      1. स्वागतम गौरी जी, हमारे इस ब्लॉग बनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य वर्कर्स को उनके अधिकार और हक की जानकारी देना और सहायता करना है.अगर हमारी जानकारी आपके काम आई तो हमारे लिए खुशी की बात है. उम्मीद करूंगा कि इस ब्लॉग के बारे में अपने सगे-सम्बन्धियों को जानकारी देंगे. आते रहियेगा.

        Delete
    7. आपका क्षमिकों को जागरुक करने का रासता बहुत ही साहारणिय हैं।

      ReplyDelete
      Replies
      1. अरुण भाई, आपका बहुत- बहुत धन्यवाद.आप भी इस मुहिम का हिस्सा बनें. अपने साथ जुड़े मजदूर भाइयों को इस ब्लॉग की जानकारी दें.

        Delete
    8. Aaj hi main HR se milke aai...wo bol rahe the ke apko kuch bhi nahi mil sakta letter vaigere..aap kya karoge letter leke...to maine bol diya kuch na kuch to karlungi....to unhone directly owner se bat karvai ....owner bole hain ke aap abhi medical leave pe raho...jab fit honge to resume kar lo
      Aapko koi jarurat nahi hain job chodne ki....aap resume karlo jab chahe aur agar apko nahi rehna hain humare sath to notice period serve karke jao...apko pura paisa milega apka...
      Thank you sir
      Apka guidence bahot imp tha

      ReplyDelete
      Replies
      1. ये हुई न बात. डर के आगे जीत है. कम्पनी या प्रबंधक तभी तक हम पर जुर्म करते जब तक हम अपने हक और अधिकार से अंजान हैं. जैसे ही हम जागरूक हुए कि समझिये वो नौ-दो-ग्यारह. खैर सुनकर अच्छा लगा कि हमारे सुझाव और आपके हिम्मत के कारण आपकी जॉब वापस मिल गए. Congratulations. आते रहियेगा.

        Delete

    अपना कमेंट लिखें

    Most Popular Posts

    loading...