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    Contract Labour Act in Hindi | अनुबंध श्रम अधिनियम 1970 | Step by Step Full Details

    Contract Labour Act in Hindi | अनुबंध श्रम अधिनियम 1970 | Step by Step Full Details

    आज लगभग पुरे देश में ठेका वर्कर (Contract Worker या Outsource Worker) धरल्ले से रखे जा रहे हैं. हर कोई इस नाम से वाकिफ हैं. यह हो सकता है कि समय और जगह के हिसाब से इनका नाम और थोड़ा बहुत टर्म और कंडीशन बदल दिया जाता हो, मगर इनको रखने का सभी विभाग या कंपनी का एक ही Purpus है. कम सैलरी देकर अपना काम निकलना, एक तरह से कह सकते हैं कि बेरोजगारी का लाभ उठाकर शोषण करना.
     

    अपने इस आर्टिकल के माध्यम से इसी कॉन्ट्रैक्ट लेबर (रेगुलेशन एंड अबूलूशन) एक्ट 1970 के बारे में चर्चा करना चाहते हैं. इसको बस अपनी सरल भाषा में समझने की कोशिश करते हैं. कॉन्ट्रैक्ट लेबर (रेगुलेशन एंड अबूलूशन) एक्ट 1970 क्या है? यह कब और किसलिए बना? कॉन्ट्रैक्ट लेबर (रेगुलेशन एंड अबूलूशन) एक्ट 1970 की परिभाषा क्या है? ठेका वर्कर (कॉन्ट्रैक्ट वर्कर) और आउटसोर्स वर्कर में क्या अंतर है?

    अगर आप कॉन्ट्रैक्ट वर्कर हैं तो आपको क्या-क्या सुविधा मिलनी चाहिए इत्यादि. अभी हम केवल संक्षेप में जरुरी जानकारी पर बात करते हैं. इसके बाद हमारी कोशिश होगी कि इसके एक-एक टर्म को बारीकी से समझेंगे. दोस्तों हो सकता है यह आर्टिकल आपको थोड़ा बड़ा लगे मगर अपने हक के बारे में  जानने के लिए थोड़ा बहुत मेहनत तो बनता है. उम्मीद है यह आपको पसंद आयेगा.


    Contract Labour (Regulation & Abolition) Act 1970 Kya hai (कॉन्ट्रैक्ट लेबर (रेगुलेशन एंड अबूलूशन) एक्ट 1970 क्या है)?

    Contract Labour (Regulation & Abolition) Act 1970 (अनुबंध श्रम नियमन और उन्मूलन) अधिनियम, 1970) का उद्देश्य अनुबंध श्रम के शोषण को रोकने और काम की बेहतर स्थिति पेश करने के लिए है. एक मजदूर को अनुबंध श्रम के रूप में किसी Organization के काम के संबंध में Contractor द्वारा या उसके माध्यम से नियोजित किया जाता है. Contract Worker (कॉन्ट्रैक्ट वर्कर) और डायरेक्ट वर्कर यानी Permanent Employees अलग होते हैं. उनके बीच नियुक्ति का तरीका और भुगतान के तरीका अलग होता है.

    यहां तक की Contract Worker का कोई मुख्य नियोक्ता से कोई संबंध नहीं होता है. Contract Worker कभी भी Principle Employer के Pay-Roll नहीं होता और उनको वह Direct Payment भी नहीं करता है. Contractor Worker की नियुक्ति उनके काम का Supervision और Benefits आदि Contractor द्वारा किया जाता है और इसके बदले Contractor को Organization/Company यानी Principle Employer पे करता है.

    पंजीकरण और लाइसेंसिंग Under Contract Labour (Regulation & Abolition) Act 1970

    जिस Company या Organization में 20 या उससे अधिक Worker पिछले 12 महीनों में Contract Labour (अनुबंध श्रम)  के रूप में एक दिन के लिए भी कार्यरत हैं. यह प्रतिष्ठानों पर लागू नहीं होगा, जिसमें केवल एक Intermittent (आंतरायिक) या Casual Nature (आकस्मिक प्रकृति) का काम किया जाता है. उस प्रतिष्ठान (कंपनी) और Contractor पर यह Act (कानून) लागु होता है. अगर कोई (Principle Employer (मुख्य नियोक्ता) या Contractor (ठेकेदार) इस अधिनियम के अंतर्गत आता है तो मुख्य नियोक्ता और ठेकेदार को क्रमशः Registration (रजिस्ट्रेशन) और लाइसेंस के पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा.

    ठेकेदार अधिनियम में यदि 15 दिन की अवधि के लिए भी वर्कर रखा जाता है तो इसके लिए अस्थायी रजिस्ट्रेशन प्रदान किया जाता है. एक बार पंजीकरण या लाइसेंसिंग प्रमाण पत्र में निर्दिष्ट विवरण में होने वाली कोई भी परिवर्तन संबंधित परिवर्तनकारी अधिकारी को ऐसे परिवर्तन के 30 दिनों के भीतर सूचित किए जाने की आवश्यकता होती है.

    संविदा श्रम (विनियमन और उन्मूलन) केंद्रीय नियम, 1971 की धारा 7 और नियम 17 और 18 के संयुक्त पढ़ने से, ऐसा प्रतीत होता है कि प्रत्येक प्रतिष्ठान के संबंध में मुख्य नियोक्ता को पंजीकरण के लिए आवेदन करना होगा.

    Penalties provision (दंड का प्रावधान) Under Contract Labour (Regulation & Abolition) Act 1970

    इस अधिनियम की Section (धारा) 9 में यह प्रावधान है कि मुख्य नियोक्ता, जिसपर यह Act (अधिनियम) लागू है. यदि अधिनियम के तहत पंजीकृत होने में विफल रहता है, फिर ऐसे प्रमुख नियोक्ता अनुबंध श्रम को रोजगार नहीं दे सकता है. यह भी प्रतीत होता है कि यदि कम्पनी रजिस्टर्ड नहीं है या यदि ठेकेदार का लाइसेंस नहीं है तो ठेका वर्कर को प्रत्यक्ष कार्यकर्ता माना जाएगा और मुख्य नियोक्ता या स्थापना अनुबंध मजदूरों की मजदूरी, सेवाओं और सुविधाओं के लिए Responsible (उत्तरदायी) होगी. इस अधिनियम के प्रावधानों या इसके तहत बनाए गए नियमों के उल्लंघन के लिए सजा 3 महीने तक की अधिकतम अवधि के लिए कारावास है और अधिकतम 1000 रुपये तक का जुर्माना है. जिसको आज तक बढ़ाया नहीं गया है.
     

    जिम्मेदारियों Under Contract Labour (Regulation & Abolition) Act 1970

    अधिनियम मुख्य नियोजक और ठेकेदार पर संयुक्त और कई जिम्मेदारियों को शामिल करता है. प्रिंसिपल नियोक्ता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ठेकेदार ठेका वर्कर को निम्नलिखित सुविधा प्रदान करेगा-
    1. सरकार द्वारा निर्धारित मजदूरी का भुगतान करती है, यदि कोई हो, या;
    2. श्रम आयुक्त द्वारा तय मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करना, यदि ऐसा हो तो 
    3. उनकी अनुपस्थिति में मजदूरों के अनुबंध के लिए उचित वेतन देता है.
    निम्नलिखित सुविधाएं प्रदान करता है-
    • कैंटीन (यदि 100 या अधिक श्रमिकों को एक स्थान पर नियोजित किया जाए) और यदि काम 6 महीने या उससे अधिक के लिए समाप्त होने की संभावना है.
    • रेस्ट रूम जहां काम करने वाले ठेका वर्कर को रात में रुकना पड़ता है और काम 3 महीने या इससे ज्यादा के लिए चलने की संभावना है.
    • पुरुषों और महिला वर्करों के लिए अलग-अलग शौचालयों और मूत्रालयों की व्यवस्था करना.
    • पीने लायक साफ़ पीने के पानी की व्यवस्था करना.
    • काम के स्थान के साफ़-सफाई से व्यवस्थित रखना.
    • वर्करों के लिए प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था करना
    • बच्चों के पालना घर- यदि 10 से अधिक महिला वर्कर काम कर रही हैं तो उनके 6 वर्ष तक के बच्चों के लिए पालना घर जिसको अंग्रेजी में क्रैच कहते है उनकी व्यवस्था करना.
    • सभी वर्कर का रिकॉर्ड रजिस्टर पर रखना. इसके साथ ही वर्कर से जुड़े हर नोटिस, अधिनियमों, नियमों आदि के सार तत्वों को बोर्ड पर प्रदर्शित करना होता है. 
    • कामगारों को रोजगार कार्ड, इत्यादि मुहैया करना.
    अगर तय समय के अंदर ठेकेदार उपरोक्त सुविधा प्रदान करने में विफल होता है तो अभी तक के कानून के अनुसार मुख्यनियोक्ता यह सभी सुविधा डायरेक्टली प्रदान करेगा. जिसके बाद वह ठेकेदार के पेमेंट में से कटौती कर सकता है.

    Under Contract Labour (Regulation & Abolition) Act 1970 Ek Nazar Me

    धारा-1(4)-20 या 20 से अधिक संविदा श्रमिको को नियोजित करने वाले प्रतिष्ठानो तथा संविदाकारों पर यह अधिनियम लागू होता है. 

    धारा-7, 12 नियम 17, 21-संलग्न शुल्क सम्बंधी चार्ट में अंकित दरों पर शुल्क जमा कर एवं संविदाकार द्वारा रूपया 30 प्रति संविदा श्रमिक प्रतिभूति भी जमा कर मुख्य सेवायोजको प्रतिष्ठानों को अपने अधिष्ठान का पंजीयन कराना तथा संविदाकारों को लाईसेंस प्राप्त करना आवश्यक है.

    धारा-10- समुचित सरकार द्वारा राज्य सलाहकार बोर्ड से परामर्श नियोजन निषिद्ध भी किया जा सकता है.

    धारा-16 से 21 नियम 40 से 62- अधिनियम में संविदा श्रमिकों के कल्याण तथा स्वास्थ्य के लिए कैन्टीन, रेस्टरूम, पानी, शौचालय ( महिला श्रमिकों के लिये पुथक से ), प्रक्षालन, प्राथमिक चिकित्सा आदि की व्यवस्था के प्रावधान है.

    धारा-21 नियम 63 से 73 तक-1000 के कम संविदा श्रमिक नियोजित करने वाले संविदाकारों द्वारा प्रत्येक माह की 7 तारीख तक तथा 1000 या उससे अधिक संविदा श्रमिक नियोजित करने वाले संविदाकारों द्वारा प्रत्येक माह की 10 तारीख तक वेतन भुगतान किया जाना आवश्यक है. अवैधानिक कटौतियां निषिद्ध है.इसके आलावा मुख्य नियोक्ता के अधिकृत प्रतिनिधि की उपस्थिति में ठेका वर्कर के मजदूरी का वितरण सुनिश्चित करना ठेकेदार की जिम्मेवारी है. 

    धारा-20 व 21-यदि संविदाकार कैन्टीन सुविधा (100 या उससे अधिक संविदा श्रमिक नियोजित करने व 06 माह तक संविदाकार्य जारी रहने की दशा में) विश्राम कक्ष सुविधा तथा उपरोक्त अन्य सुविधायें संविदा श्रमिकों को देने में कोई चूक की जाती है तो यह संविधायें मुख्य सेवायोजक द्वारा निश्चित समय के अन्तर्गत दी जायेगीं. जिसका समायोजन वह संविदाकार के बिल/कर्जे से कर सकता है.
    इसी प्रकार नियत समय पर संविदाकार द्वारा वेतन भुगतान न करने पर मुख्य सेवायोजक द्वारा संविदा श्रमिकों का वेतन भुगतान किया जायेगा जिसका वह संविदाकार के बिल/कर्जे के साथ समायोजन करेगा. मुख्य सेवायोजक के नामित अधिकृत प्रतिनिधि की उपस्थिति में संविदा श्रमिक की मजदूरी का भुगतान होगा और भुगतान प्रमाणित होगा.

    धारा-29 नियम 74 से 84- अधिनियम के अन्तर्गत निर्धारित अभिलेख जैसे संविदाकारों का रजिस्टर, मजदूरों के हाजरी-मजदूरी रजिस्टर, Nature of Duty, Deduction Register, Overtime Register, Wages Slip,  आदि अभिलेख रखें जायेंगे. श्रमिकों को निर्धारित प्रपत्र में नियोजन कार्ड दिया जायंगा, तथा निर्धारित प्रपत्र में नियोजन कार्ड दिया जायेगा, तथा निर्धारित प्रपत्र में मुख्य सेवायोजक द्वारा 15 फरवरी तक वार्षिक विवरण तथा प्रत्येक संविदाकार द्वारा 30 जुलाई तक एवं 30 जनवरी तक अर्द्धवार्षिक विवरण श्रम विभाग में प्रेषित किये जायेंगे.
    समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 समान कार्य के लिये महिला एवं पुरूष श्रमिकों की मजदूरी में भेदभाव तथा लिंग के आधार पर नियोजन देने सम्बन्धी भेदभाव आदि को समाप्त करने एवं महिला सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से उक्त अधिनियम बनाया गया है. केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचित समस्त अधिष्ठानों पर इस अधिनियम के प्रावधान लागू होते है.

    धारा-4 एवं 5-समान कार्य अथवा समान प्रकृति के कार्य के लिये पुरूषो तथा महिला श्रमिकों को समान पारिश्रमिक दिये जाने का दायित्व नियोजक का है. किसी कानून विशेष द्वारा महिला श्रमिकों का नियोजन निषिद्ध न होने की दशा में किसी कार्य पर नियोजन हेतु महिला श्रमिकों के नियोजन, प्रोन्नति प्रशिक्षण आदि में भेदभाव नहीं किया जायेगा.

    नियम 25-(2)(v)(a)- Contract Labour (Regulation and Abolition) Act, 1970 and Central Rules framed thereunder के अनुसार, ""अगर कोई ठेकेदार के द्वारा न्युक्त ठेका वर्कर अपने प्रधान नियोक्ता द्वारा न्युक्त वर्कर के बराबर कार्य करता है, तो ठेकेदार के द्वारा काम करने वाले ठेका वर्कर का वेतन, छुटटी और सेवा शर्ते उस संस्था के प्रधान नियोक्ता के वर्कर के बराबर होगा"

    धारा-8 नियम 6- सेवायोजकों द्वारा निर्धारित प्रपत्र डी में कर्मकारों की पंजिका रखी जायेगी.

    धारा-7, 9 से 18- अधिनियम के प्रावधानों के परिपालन की जांच हेतु निरीक्षण की व्यवस्था की गई है तथा दावों व शिकायतों को सुनने व निस्तारित करने हेतु प्राधिकारी नियुक्त किये जाने की भी व्यवस्था की गई है. महिला श्रमिको की मजदूरी आदि के सम्बन्ध में भेदभाव करने पर प्रथम अपराध के लिये कम से कम 10 हजार रूपये जुर्माना जो 20 हजार रूपये तक हो सकता है यह कम से कम 3 माह की सजा जो एक साल तक की हो सकती है, के दण्ड से दण्डित किये जाने का प्रावधान है. अन्य आराधों के लिये भी दण्ड की व्यवस्था है.

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