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    मोदी सरकार ने 375 रुपया की सिफारिश ठुकराई, अब कितना होगा न्यूनतम वेतन

    मोदी सरकार ने 375 रुपया की सिफारिश ठुकराई, अब कितना होगा न्यूनतम वेतन

    अब जैसा कि पुरे देश में वेज कोड बिल 2019 लागू हो चूका हैं. अब इसके बाद केंद्र सरकार को मिनिमम फ्लोर वेज तय करना हैं. जिसको नोटिफाइड किया जायेगा. इसके बारे में हमने अपने पूर्व के पोस्टों में जानकारी दी हैं. अब इसके बाद एक खबर आ रही है कि "मोदी सरकार ने 375 रुपया की सिफारिश ठुकराई, अब कितना होगा न्यूनतम वेतन"?

    यह आज का सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अब आखिर न्यूनतम वेतन कितना होगा. आज देश के हर वर्कर को इसका बेसब्री से इन्तजार हैं.

    मोदी सरकार ने 375 रुपया की सिफारिश ठुकराई?

    जैसा की हमने पहले ही आशंका जाहिर की थी ठीक वैसा ही हुआ. केंद्र की मोदी सरकार ने एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव 375 रुपया दिहाड़ी मजदूरी का प्रस्ताव ठुकरा दिया हैं. टेलीग्राफ के खबर के अनुसार सरकार दुबारा से नया न्यूनतम वेतन के आंकलन के लिए एक कमेटी गठित की हैं. जो की हाल ही में पारित वेज कोड बिल 2019 के तहत फ्लोर वेज तय करने के बाद नोटिफिकेशन जारी किया जायेगा.

    अब कितना होगा न्यूनतम वेतन?

    जिसके बाद वेज कोड बिल 2019 के अनुसार कोई भी राज्य इससे कम न्यूनतम वेतन तय नहीं कर सकती हैं. इसके बारे में अधिकारियों का कहना है कि श्रम व् रोजगार मंत्रालय ने फ्लोर वेज को 200 से 250 के बीच रखने के संकेत दिए हैं. सरकार के द्वारा इस मजदूरी को स्वीकार किया जा सकता हैं.

    इस खबर में दावा किया गया हैं कि एक कमेटी की सिफारिश को अगले सप्ताह तक नोटिफाइड किये जाने की सम्भावना जताई गई हैं. इसके बारे में राज्य से फीडबैक भी माँगा जायेगा. इसके बाद सेन्ट्रल मिनिमम वेजेज एडवाइजरी बोर्ड की बैठक आयोजित की जायेगी. जो कि त्रिपक्षीय कमेटी होगी, जिसमें लेबर विभाग, एम्प्लायर व् ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधि होंगे.


    आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सेन्ट्रल मिनिमम वेजेज एडवाइजरी बोर्ड का गठन किया जा चुका हैं. अगर आप जानना चाहते हैं कि मजदूरों का बात रखने के लिए इसमें किस-किस ट्रेड यूनियन से कौन-कौन सदस्य हैं तो आप नीचे कमेंट करके पूछ सकते हैं.

    भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय ने 17 जनवरी 2017 को चेयरमैनशिप डॉ अनूप सत्पथी, फेलो, वी. वी. गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान (वीवीजीएनएलआई) के तहत एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) का गठन किया था, जिसने 14-02-2019 को सचिव, श्रम और रोजगार मंत्रालय के माध्यम से भारत सरकार को "न्यूनतम राष्ट्रीय वेतन के निर्धारण के लिए कार्यप्रणाली का निर्धारण" पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी. जिसमें भारत भर के लाखों अनौपचारिक श्रमिक के लिए 375 रुपये प्रतिदिन या 9,750 रुपये प्रति माह की सिफारिश की गई थी. इसमें अलग अलग राज्यों का न्यूनतम वेतन 342 से 447 रुपया प्रतिदिन हो सकती थी. अगर इसको Central Sphare के न्यूनतम वेतन से तुलना करें तो काफी कम हैं, मगर फिर भी केंद्र की मोदी सरकार ने इसको नकार दिया हैं.

    सेंट्रल सफर चीफ लेबर कमिश्नर (सेंट्रल) के द्वारा न्यूनतम वेतन का नोटिफिकेशन जारी किया जाता हैं. जिसका फायदा सेंट्रल गवर्नमेंट के अंडर आने वाले डिपार्टमेंट्स जैसे रेलवे, एयरपोर्ट, आईआरसीटीसी आदि में काम करने वाले ठेका, आउटसोर्स, डेलीवेजर आदि वर्कर्स को मिलता हैं. अभी सेंट्रल सफर के अप्रैल 2019 के नोटिफिकेशन के तहत पुरे देश में सेन्ट्रल सफर का न्यूनतम वेतन 390 -772 रुपया प्रतिदिन हैं. इसके बारे में अधिक जानकारी व् नोटिफिकेशन का कॉपी डावनलोड करने के लिए हमारे इस पोस्ट को पढ़िए- Central Government Minimum Wages 01 April 2019 से कितना वृद्धि किया.

    ऐसे टेलीग्राफ के रिपोर्ट में अधिकतर राज्यों की न्यूनतम मजदूरी 200 रुपया बताया गया हैं जबकि अभी हाल जून 2019 में नागालैंड का न्यूनतम वेतन 176 रुपया प्रतिदिन का नोटिफिकेशन जारी किया गया हैं. जबकि कुछ दिन पहले ही वेज कोड के तहत श्रम मंत्री द्वारा फ्लोर वेज के 178 रुपया प्रतिदिन  लाइव मिंट की खबर आने के बाद काफी किड़किडी हुई थी. जिसके बाद अब 200-250 रुपया के बीच तय करने की खबर आ रही हैं. जो कि अभी भी बहुत ज्यादा नहीं हैं. ऐसे समय में जब सड़क परिवहन का जुर्माना भी 1000 रुपया से कम नहीं हैं.

    मोदी सरकार ने 375 रुपया की सिफारिश ठुकराई, अब कितना होगा न्यूनतम वेतन 



    पहले तो परमानेंट और आउटसोर्स के वेतन में एक चौथाई का फर्क था. मगर सुरजीत श्यामल बनाम भारत सरकार व् अन्य  जनहित याचिका के बाद सेंट्रल गवर्नमेंट के अंडर काम करने वाले ठेका आउटसोर्स वर्कर का अभी कम से कम न्यूनतम वेतन 390 - 772 रुपया प्रतिदिन हैं. मगर उसी राज्य में राज्य सरकार अंडर आने वाले ठेका आउटसोर्स वर्कर एक न्यूनतम वेतन 176 रुपया भी हैं. इससे तो स्पष्ट हो गया कि सरकार ने अपनी मर्जी से 42 प्रतिशत न्यूनतम वेतन नहीं बढ़ाया. अब ऐसे में केंद्र सरकार को सोचना चाहिए कि क्यों न सभी राज्यों का न्यूनतम वेतन Center Sphare के तर्ज पर 390 - 772 रुपया प्रतिदिन किया जाए.
     

    मगर यह सरकार के लिए इतना आसान नहीं होगा. इसके लिए न्यूनतम मजदूरी पर काम करने वाले वर्करों को आवाज बुलंद करना होगा. याद रखिये मिडिया से भी ऊपर शोशल मिडिया की ताकत हैं. आज आपके विरोध के कारण ही सरकार फ्लोर न्यूनतम वेतन 178 से बढ़ाकर 200-250 के बीच करने को बाध्य हुई हैं. अगर कल यूनिटी के साथ जोर लगायेंगे तो 390 का आंकड़ा भी ज्यादा दूर नहीं हैं. 

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