दिल्ली सरकार ने Draft of the Code on Wages Delhi Rules 2021 सुझाव मांगे

दिल्ली सरकार के लेबर कमिश्नर ऑफिस ने 26 नवंबर 2021 को अपने आधिकारिक वेबसाइट पर Draft of the Code on Wages (Delhi) Rules, 2021 उपलोड कर टिप्पणियां और सुझाव मांगे हैं। जिसके तहत आपको अपनी आपत्ति व् सुझाव 30 दिन के अंदर अपर सचिव (मुख्यालय) ([email protected]), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार, 5-शामनाथ मार्ग, दिल्ली-54 को भेजना है। इसमें यह भी लिखा है कि इसके बाद भेजे गए आपत्ति व् सुझाव पर विचार नहीं किया जायेगा। हम इसकी मुख्य बातों पर नजर डालते हैं।

Draft of the Code on Wages Delhi Rules 2021

हालांकि, Draft of the Code on Wages Delhi Rules 2021 की जानकारी हमें पिछले हप्ते ही मिली है। जिसके कुल 65 पेज को पढ़ने के बाद हम आपको इसके बारे में कुछ अहम् जानकारी देने जा रहे हैं । जिसके आधार पर आप 25 दिसंबर 2021 तक अपना आपत्ति व् सुझाव उपरोक्त ईमेल आईडी पर भेज सकते हैं। पहले भी हमने केंद्र सरकार द्वारा जारी Code of Wages केंद्रीय रूल्स के ड्राफ्ट की जानकारी शेयर की थी।

Code of Wages Act 2020 in hindi

केंद्र सरकार के द्वारा Wage Code Bill 2020 को संसद के दोनों सदनों में पास किया गया है। जिसके बाद केंद्र सरकार के तरफ से दावा किया जा रहा है कि इस कानून से देश के करोड़ों श्रमिकों का फायदा होगा। जबकि Wage Code Bill 2020 के प्रभाव में आते ही न्‍यूनतम वेतन अधिनियम 1948, वेतन भुगतान अधिनियम, 1936, बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 तथा समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 समाप्त हो जायेंगे। केंद्र सरकार के द्वारा दावा किया जा रहा है कि Wage Code Bill में उपरोक्त चारों कानूनों के प्रासंगिक प्रावधानों को शामिल किया गया है। जबकि आपको इसको पूरा पढ़ेंगे तो सच्चाई कुछ और ही निकल कर आयेगी।

दिल्ली सरकार द्वारा वेतन पर संहिता का मसौदा दिल्ली नियम 2021

अब हम अपने अहम मुद्दे पर आते हैं। अब जैसा कि दिल्ली सरकार वेज कोड बिल लागू करने जा रही है। जिसके लिए दिल्ली के लेबर विभाग ने वेतन पर संहिता का मसौदा दिल्ली नियम 2021 (Draft of the Code on Wages Delhi Rules 2021) पर जनता से आपत्ति या सुझाव मांगे हैं। हम न केवल इसकी मुख्य बातें बताने जा रहे हैं बल्कि इस ड्राफ्ट का कॉपी भी देंगे। जिसको आप खुद से भी पढ़ सकें।

न्यूनतम मजदूरी दर गणना की तरीका

दिल्ली सरकार के ड्राफ्ट के अनुसार, आपका न्यूनतम वेतन मतलब एक मजदूर परिवार को जिन्दा रहने के लिए सबसे कम वेतन का निर्धारण करना होता है। जिसके लिए एक मजदूर परिवार में तीन यूनिट यानी पति+ पत्नी +दो बच्चें शामिल होंगे। जिसमें राष्ट्रीय पोषण संस्थान द्वारा निर्धारित अथवा 2731 कैलरी प्रति यूनिट कैलोरी का सेवन प्रति यूनिट होगा।

इसके साथ ही प्रति मजदूर परिवार को तन ढकने के लिए प्रति वर्ष 66 मीटर कपड़ा और आवासीय किराया जो कि भोजन व् वस्त्र व्यय का 10 फीसदी होगा। आपके न्यूनतम वेतन में ईंधन, बिजली और विविध वस्तुओं का 20% व्यय, और बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा आवश्यकताओं और आकस्मिकताओं पर 25% व्यय का निर्धारण किया गया है। आपके परिवार में आश्रित माता पिता को शामिल नहीं किया गया है। जबकि उनको आपके राशन कार्ड, पीएफ और ESIC में शामिल किया गया है।

मजदूरी की न्यूनतम दर के निर्धारण के लिए मानदंड

दिल्ली सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी की दर तय करने के लिए कौशल वर्गीकरण के सम्बन्ध में सलाह देने के लिए एक टेक्नीकल कमेटी का गठन किया जायेगा। जिसमें श्रम आयुक्त की अध्य्क्षता में अपर श्रमायुक्त, कौशल विभाग से सम्बंधित अन्य सभी सरकार के द्वारा नियुक्त प्रतिनिधि ही होंगे। अब सरकारी अधिकारी ही आपके न्यूनतम वेतन का निर्धारण करेंगे।

महंगाई भत्ते के पुनरीक्षण हेतू समय अंतराल

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रियायती दर पर आवश्यक वस्तुओं के संबंध में रियायती नकद मूल्य निर्वाह भत्ते की लागत की गणना 01 अप्रैल से पहले एक बार की जाएगी और उसके बाद न्यूनतम मजदूरी पर कर्मचारियों को देय मंहगाई भत्ता मंहगाई भत्ता प्रतिवर्ष 01 अक्टूबर से पहले संशोधित करने का प्रयास किया जायेगा। अगर आप शब्दों को गौर से पढ़ेंगे तो इसका मलतब यह निकलता है कि अप्रैल में तो जारी करेंगे, मगर अक्टूबर में जारी करने का प्रयास करेंगे।

एक समान्य कार्य दिवस के निर्माण हेतू कार्य के घंटों की संख्या

एक सामान्य कार्य दिवस का गठन करने वाले घंटों की संख्या 8 घंटे होगी तथा विश्राम का एक या एक से अधिक अंतराल कुल मिलाकर एक घंटे से अधिक नहीं होगा। किसी कर्मचारी के कार्य दिवस इस प्रकार से व्यवस्थित होगा कि विश्राम के अंतराल के, मिलाकर यदि कोई है तो भी एक दिन में इसमें विस्तार 12 घंटे से अधिक नहीं हो होगा। दिल्ली सरकार ने भी केंद्र सरकार के 9 घंटे की शिफ्ट को घुमा-फिरा कर लिखा है। इसके साथ ही बड़े ही चालाकी से एक दिन का काम के घंटे का विस्तार अधिकतम 12 घंटे तक लिख दिया है।

विश्राम का सप्ताहिक दिन

इस नियम के प्रावधानों के अनुसार एक कर्मचारी को एक हप्ते में एक दिन का आराम दिया जायेगा। जो कि आमतौर पर रविवार को हो सकता हैं। मगर नियोक्ता सप्ताह में किसी एक दिन को किसी भी कर्मचारी या कर्मचारी को आराम दिवस के रूप में नियत कर सकता हैं। मगर बदलाव की स्थिति में नियोक्ता द्वारा कार्यस्थल पर प्रदर्शित करना होगा।

Wage Code Bill 2021 Gazette Notification

यही नहीं बल्कि रात की पाली, मजदूरी की भुगतान, बोनस का भुगतान और मजदूरी पर दिल्ली राज्य सलाहकार समिति बोर्ड के गठन में भी बड़े ही चालाकी से प्रावधानों को बदल दिया गया है। दिल्ली राज्य सलाहकार समिति बोर्ड में दिल्ली सरकार द्वारा नामित किये जाने वाले नियोक्ता व एवं कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति तथा स्वतंत्र व्यक्ति एवं राज्य के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस नियम के अनुसार नियोक्ता और कमचारियों के 12-12 प्रतिनिधि होंगे। जबकि पहले ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधि को शामिल किया जाता था।

अभी तक आपको गोदी मिडिया के द्वारा बताया जा रहा था कि वेज कोड बिल के लागू होने से पुरे देश के प्राइवेट कर्मचारियों का वेतन 24 हजार हो जायेगा। जबकि इसके बारे में पहले ही हमने सचेत कर दिया था। यही नहीं बल्कि केंद्र सरकार द्वारा एक फ्लोर वेज (National Minimum Wages) तय किया जायेगा। जिससे कम कोई भी राज्य सरकार न्यूनतम वेतन निर्धारित नहीं कर सकती है।

Wage Code Bill 2021 latest news hindi

अगर आप दिल्ली सरकार द्वारा जारी ड्राफ्ट रूल्स को ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको एक सामान्य कार्य दिवस में 9 कार्य घंटे तक शामिल होंगे। जबकि उन्होंने दूसरे पारा में काम का विस्तार 12 घंटे तक का लिखा है। जबकि पहले प्रति सप्ताह काम घंटे की एक सीमा निर्दिष्ट की जाती थी। जबकि पहले काम के घंटे कारखाना अधिनियम 1948 के प्रावधानों के अनुसार होता था। जिसको वेज कोड के रूल्स में सिरे से नकार दिया गया है।

एक तरह से देखें तो यह भारत द्वारा अनुमोदित ILO कन्वेंशन का उल्लंघन कर सकता है, जिसने औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए अधिकतम साप्ताहिक कार्य समय 48 घंटे निर्धारित किया था। यही नहीं बल्कि वर्तमान न्यूनतम मजदूरी (केंद्रीय) नियम, 1950 यह निर्दिष्ट करता है कि सामान्य कामकाजी सप्ताह में प्रति सप्ताह 48 घंटे शामिल होंगे।

कच्चे मजदूरों को पक्का करेंगे?

दिल्ली सरकार भी मोदी सरकार के राह पर जा रही है। जो कि कच्चे मजदूरों को पक्का करेंगे के वादों पर सत्ता पर काबिज हुई। अब दिल्ली सरकार भी आपको समान वेतन का सपना दिखाकर मजदूरों के 4 अहम् कानून ही नहीं समाप्त करेंगे बल्कि आपके काम के घंटे भी बढ़ा देंगे। जिसके बाद आपको निर्धारित 8 घंटे के न्यूनतम वेतन में 12 घंटा भी काम करवा लें तो मालिकों को फर्क नहीं पड़ेगा। जबकि इसके लागू होते ही आपके टेक होम सैलरी पर भी फर्क पड़ेगा।

दिल्ली सरकार ने Draft of the Code on Wages Delhi Rules 2021 सुझाव मांगे

अब आप ही तय कीजिए कि दिल्ली सरकार द्वारा Draft of the Code on Wages Delhi Rules 2021 द्वारा किसको फायदा होगा?

आप चाहें तो इस ड्राफ्ट को खुद से नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं। जिसके बाद आपको हमारी बातें समझ में आये तो उपरोक्त दिए ईमेल पर सीधे 2 लाइन लिखकर भेजिए कि “यह कानून हमें मंजूर नहीं. हम इसका विरोध करते हैं। इसको तुरंत ही रद्द किया जाए”। यही नहीं बल्कि हमारी इस जानकारी को अपने अधिक से अधिक साथियों तक पहुंचाने में मदद करें।

Draft of the Code on Wages Delhi Rules 2021

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10 thoughts on “दिल्ली सरकार ने Draft of the Code on Wages Delhi Rules 2021 सुझाव मांगे”

  1. यह कानून हमें मंजूर नहीं है .में इसका विरोध करता हूं .इस कानून को तुरंत रद्द किया जाएं

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    • बिलकुल, आप बस इतना ही लिखकर ऊपर पोस्ट में दिए ईमेल आईडी पर भेज दें.

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    • बिलकुल, आप बस इतना ही लिखकर ऊपर पोस्ट में दिए ईमेल आईडी पर भेज दें.

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  2. Yeh wage code bill pass hone pe न्यूनतम वेतन कितने से शुरू होगी?? अगर ₹24000/- से अकुशल की वेतन शुरू होती है तो आपत्ति नहीं hai। और साल मैं 1 April से पहले DA 10% बढ़ा देता है तो यह बिल सही है।

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    • यह किसने कहा कि न्यूनतम वेतन 24 हजार से शुरू होगा? आज सरकारी कर्मचारी को 18000 न्यूनतम वेतन मिलता है और कहाँ आप गोदी मिडिया की बातों में गुमराह हो रहें।

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    • फिर जल्दी से आप हमारी तरह सरकार को यही बात लिखकर भेज दें

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  3. Ye rules lagu nhi hone chaiye kyuki in rules k sath employee ko employer ka gulam banaya ja raha h m in rules k virod m hu

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